image: A tribute to girish chandra tiwari

Video: 22 अगस्त का दिन नहीं भूलेगी देवभूमि, पहाड़ के महापुरुष को यादगार श्रंद्धांजलि

Aug 22 2017 11:52AM, Writer:kapil

ये कहानी हम आपको बताएं, उससे पहले हमारी आपसे दर्ख्वास्त है कि ये वीडियो जरूर देखिए। उत्तराखंड का एक कालजयी शख्स हमारी आखों के सामने आता है। उसके बाद उन्हें श्रद्धांजलि देता गौरव पांडे का ये बेहतरीन गीत। कहां से शुरुआत करे, शायद आज पहली बार दिमाग भन्ना सा गया है। 22 अगस्त अचानक आंखों से सामने घूम गया। ये वो दिन है, जब गिर्दा यानी गिरीश चंद्र तिवारी इस दुनिया से चले गए थे। इन्हें उत्तराखंड का अभिभावक भी कहें तो कोई शक नहीं। 10 सितंबर, 1945 को अल्मोड़ा के ज्योली हवालबाग गांव में गिरीश चंद्र तिवारी का जन्म हुआ था। उनके पिता हंसादत्त तिवारी और मां का नाम जीवंती तिवाडी था। गिर्दा जिंदगी भर संघर्षों से जुड़े रहे, आंदोलनों से जुड़े रहे और अपनी लेखनी को उन्होंने अपनी ताकत बनाया।

अपनी कविताओं में पहाड़ की पीड़ा को सशक्त अभिव्यक्ति दी। घर का खर्च चलाने के लिए उन्होंने क्लर्क से लेकर वर्कचार्जी तक का काम किया। इसके बाद संस्कृति और सृजन के संयोग ने उनके दिल में कुछ अलग करने की चाहत भर दी। उनकी ये इच्छा तब पूरी हुई जब उन्हें हिमालय और पहाड़ की लोक संस्कृति के लिए कुछ करने का मौका मिला। ‘अंधेरी नगरी’, ‘अन्धायुग’, ‘थैंक्यू मिस्टर ग्लॉड’ और ‘भारत दुर्दशा’ जैसी रचनाएँ आज भी इतिहास के पन्नो से पुकारकर इस महान कवि की कल्पनाओं की बानगी पेश करती है। इसके साथ ही ‘नगाड़े खामोश हैं’ और ‘धनुष यज्ञ’ जैसे नाटकों का गिर्दा ने लेखन किया। पहाड़ के लिए उन्होंने ‘शिखरों के स्वर’, ‘हमारी कविता के आँखर’ का सह लेखन और ‘रंग डारि दियो हो अलबेलिन में’ के वो संपादक रहे।

22 अगस्त 2010 सुबह हल्द्वानी में इस महान कवि का देहांत हो गया। आज जो वीडिय़ो हम आपको दिखाने जा रहे हैं, वो वीडियो साबित करता है कि गिर्दा जैसे लोग कभी मरते नहीं। ये वीडियो साबित करता है कि कि गिर्दा जैसे लोग एक व्यक्तित्व होते हैं, एक विचार होते हैं और विचार कभी मरा नहीं करते। ये वीडियो साबित करता है कि गिर्दा हमेशा लोगों के दिल और दिमाग में जिन्दा रहेंगे। ये वीडियो साबित करता है कि गिर्दा के विचार भी हमेशा हमारे दिमाग में अंकित रहेंगे। अगर इस बार इस वीडियो को गौरव पांडे के सबसे बेहतरीन गीतों में शुमार किया जाए तो गलत नहीं होगा। गिर्दा ने जनपक्षधरता और जन सरोकारों की जो लौ जलाई है, वो एक अखण्ड ज्योति बन कर हमेशा जलती रहेगी। फिलहाल आप ये बेहतरीन गीत सुनिए।


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