चीन को हिंदुस्तान का ‘विनाशकारी’ जवाब, हरक्यूलिस विमानों की फौज तैयार !
Aug 24 2017 9:18PM, Writer:सुरेश
डोकलाम में पिछले 2 महीने से भारत और चीन की सेनाएं एक दूसरे के आमने सामने जमी हैं। चीन की तरफ से लगातार भारत को धमकियां दी जा रही हैं। इधर भारत भी जानता है कि चीन किसी भी वक्त अपनी हरकत दिखा सकता है। पीएम मोदी अच्छी तरह से इस बात को जानते हैं। इसलिए भारत की तरफ से भी पूरी तैयारियां की जा रही हैं। इस बीच भारतीय वायु सेना भी तैयार हो रही है। बढ़ते तनाव के बीच भारतीय वायु सेना भी हर हालात से निपटने के लिए अपनी ताकत में लगातार बढ़ोतरी करती जा रही है। चीन से निपटने के लिए ये काम करना बेहद जरूरी भी है क्योंकि ड्रैगन की तरफ से लगातार धमकी मिल रही है। बढ़ते गतिरोध के इंडियन एयरफोर्स ने पश्चिम बंगाल में कोलकाता से करीब 150 किलोमीटर दूर अर्जन सिंह एयर पोर्ट स्टेशन पर C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान तैनात कर दिए हैं।
सामरिक दृष्टि से सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस विमान का अलग ही महत्व है। इसे लैंड करने के लिए ज्यादा बड़े रनवे की जरूरत नहीं होती। खास बात ये है कि ये खराब से खराब मौसम में भी उड़ान भर सकता है। इसके साथ ही लैंडिंग भी कर सकता है। ये विमान 20 टन तक बारूद अपने साथ ले जा सकता है। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि एक बार में ये विमान अकेले ही कितनी तबाही मचा सकता है। इसके साथ ही इस विमान में करीब 80 सैनिक हथियारों के साथ उड़ सकते हैं। वायुसेना का ये सबसे बड़ा मालवाहक विमान है। इसकी मौजूदगी से सीमा के पास अब पहले से कहीं ज्यादा बड़ी तादाद में सैनिकों को लाया-ले जाया सकता है। इसके साथ ही इसके जरिए बड़ी मात्रा में रसद की आपूर्ति की जा सकती है। भारत में इन विमानों को अब तक का सबसे आधुनिकतम विमान कहा जा सकता है। अमेरिका ने भारत को इन विमानों को अरबों रुपये के पैकेज में दिया है।
इस बीच पनागढ़ में इस विमान को तैनात कर दिया गया है। साफ तौर पर चीन की हर चाल का जवाब देने के लिए इस ताकतवर विमान को पनागढ़ एयरबेस में तैनात किया गया है। इस तरह से एक भी हरकत पर भारत का ये अस्त्र एक्टिव हो सकता है। गाजियाबाद में हिंडन एयरबेस के बाद पनागढ़ देश में दूसरी जगह है जहां C-130J सुपर हरक्यूलिस का बेस है। इसके साथ ही कहा जा रहा है कि सुखोई एसयू -30 एमकेआई और इलुशिन आईएल -78 के मिड-एयर रिफ्यूलर भी पनागढ़ एयर बेस पर हैं। डोकलाम को लेकर चीन और भारत के बीच गतिरोध जून में शुरू हुआ है। खास बात ये है कि चीन इस वक्त अपनी धमकियों से बाज नहीं आ रहा है। तो कुल मिलाकर कहें तो सामरिक दृष्टि से पीएम मोदी ने ये अच्छा कदम उठाया है। भारत ने साफ कर दिया है कि डोकलाम से तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक चीनी सेना पीछे नहीं हट जाती।