उत्तराखंड का एक ऐतिहासिक गांव, जहां बनेगा देश का पहला ‘गो’तीर्थ !
Aug 25 2017 8:27AM, Writer:SUMIT
देवभूमि उत्तराखंड, जहां आपको कदम कदम पर ऐसे नजारे देखने को मिलते हैं कि आप भी खुद हैरान हो जाएंगे। जहां आप आप जाएंगे, उन जगहों का इतिहास अगर आप पढ़ेंगे तो आपको और भी ज्यादा गर्व होगा। लेकिन आज हम आपको उत्तराखंड के एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां देश का पहला गोतीर्थ बनेगा। आज देश में गाय एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। जिसे देखिए वो इस पर चर्चा कर रहा है। लेकिन उत्तराखंड एक ऐसी जगह है, जहां सदियों से गाय को मां का स्वरूप माना जाता है। आज भी आप उत्तराखंड के किसी गांव में चले जाएं तो आपको अहसास होगा कि उत्तराखंड के लोगों और गाय के बीच कितना प्रेम है। हर घर की गोशाला में आपको गाय मिलेगी। अगर यूं कहें कि उत्तराखंड के घर घर में एक गोधाम है, तो गलत नहीं होगा।
खैर क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड के एक गांव से ही गोरक्षा को लेकर सबसे पहले खूनी संघर्ष हुआ था। हालांकि तमाम सरकारें आई और गई, लेकिन किसी का ध्यान इस गांव पर नहीं पड़ा। लेकिन त्रिवेंद्र सरकार का ध्यान अब इस गांव पर गया है। हम बात कर रहे हैं हरिद्वार के कटारपुर गांव की। ये व ही गांव है जहां गोरक्षा क लेकर सबसे पहले खूनी लड़ाई लड़ी गई थी। व साल 1918 का वक्त था। उस वक्त कटारपुर गांव में गोरक्षा के लिए भयंकर जंग हुई थी। इस खूनी संघ्र्ष में कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। अब सरकरा का कहना है कि इस गांव में देश का पहला गोतीर्थ बनाया जाएगा। इसके लिए बकायदा प्लान भी तैयार हो चुका है। जब गांव वालों को इस खबर के बारे में पता चला तो वो बेहद ही खुश हो गए। इसके अलावा भी इस खबर से जुड़ी कुछ और भी बातें हैं।
हर किसी का कहना है कि 1918 में हुए खूनी संघर्ष में जान गंवाने वालों के लिए ये एक सच्ची श्रद्दांजलि साबित होगी। गांव वालों का कहना है कि 1918 में हुए खूनी संघर्ष में जो लोग मारे गए थे, गो तीर्थ बनने से उनके परिवार के लोगों को खुशी मिलेगी। इतिहास के पन्नों को आप पलटकर देखेंगे तो इस गांव में ही सबसे पहले गोरक्षा को लेकर लड़ाई लड़ी गई थी। आज दब देश में गोरक्षा और गाय एक मुद्दा बना है, वहीं उत्तराखंड ने ये ज्ञान देश और दुनिया को 1918 में ही दे दिया था कि गाय हम उत्तराखंडियों के लिए कितनी जरूरी है। लंबे समय बाद अब राज्य सरकार कटारपुर गांव को गोतीर्थ बनाने की तैयारी कर रही है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रतिनिधि मंडल से बकायदा सरकार ने सलाह भी ली है। आखिरकार इस गांव को गोतीर्थ बनाए जाने की उम्मीद जगी है।