देवभूमि के ‘सिंघम’ का ऐतिहासिक काम, अब पहाड़ों को दिया सबसे बड़ा तोहफा !
Aug 28 2017 8:19AM, Writer:कपिल
उत्तराखंड के पहाड़ों में कोई ई-रिक्शा चलाने के बारे में कल्पना कर सकता है ? क्या कोई कभी सोच सकता है कि दिल्ली या फिर बाकी मेट्रो सिटीज में चलने वाला ई-रिक्शा कभी पहाड़ों में चलेगा ? लेकिन अब सोचिए और बार बार सोचिए, क्योंकि उत्तराखंड के रियल लाइफ ‘सिंघम’ ने वो कर दिखाया है, जो आज तक पहाड़ों में नहीं हुआ। इसिलिए हम कहते हैं कि मंगलेश घिल्डियाल जैसा जिलाधिकारी आज हर जिले में होना चाहिए। जनता को सुविधा पहुँचाने के लिए जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल लगातार कोशिशों में जुटे हैं। अब रुद्रप्रयाग में कलेक्ट्रेट और विकास भवन जाने वाले गरीब लोगों की आवाजाही की दिक्कतों को देखते हुए रुद्रप्रयाग में भी ई रिक्शा चलेंगे। इसके लिए जनता को बेहद कम किराया देना होगा। इसके साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
आपको यहां खास बात ये भी बता दें कि ई रिक्शा का सफल ट्रायल हो गया है। यानी साफ है कि अब रुद्रप्रयाग में भी ई रिक्शा दौड़ेंगे। इसके लि लोग जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल और आरटीओ पंकज श्रीवास्तव का लगातार धन्यवाद दे रहे हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किस स्पीड से ये जिलाधिकारी काम कर रहा है। आज जहां देखिए वहां मंगलेश की पूछ है। यहां तरक कि केदारनाथ से अपना मिशन 2019 शुरू करने के लिए खुद पीएम मोदी ने भी मंगलेश को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। जिस रुद्रप्रयाग में कभी ई-रिक्शा की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, उस रुद्रप्रयाग में ई-रिक्शा भी है और वो रोजगार भी पैदा करेगा। आज दिल्ली और बाकी मेट्रो सिटीज में ई-रिक्शा एक नायाब पहल बनकर उभरा है। ये पर्यावरण भी बचा रहा है और रोजगार भी दे रहा है।
मंगलेश घिल्डियाल ने इस बार वो काम कर दिखाया है, जिसके बारे में शायद कोई सोच भी नहीं सकता था। अब माना जा रहा है कि एक प्रयोग के सफल होने के बाद रद्रप्रयाग में लगातार ऐसे और भी प्रयोग किए जा सकते हैं। मंगलेश ने दरअसल एक रास्ता दिखाया है,जिसका जनता लगातार अनुसरण कर रही है। जाहिर है कि मंगलेश जैसे डीएम अगर उत्तराखंड के हर जिले को मिल जाएं तो बात ही कुछ और होगी। मंगलेश घिल्डियाल एक ऐसे अधिकारी हैं, जो देश के सबसे ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ ऑफिसर्स में से एक कहे जाते हैं। इस जिम्मेदारी को भी उन्होंने पूरी कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाया है। मंगेलेश को देखकर लगता है कि अब पहाड़ की तस्वीर बदल रही है और कुछ उम्मीद की किरण इस ओर आती हुई नजर आ रही।