उत्तराखंड का शेरदिल आर्मी ऑफिसर, डोकलाम में जीत का ‘नायक’
Aug 30 2017 8:25PM, Writer:मीत
डोकलाम के बारे में तो आप अच्छी तरह से जानते होंगे। तीन महीने के लंबे संघर्ष के बाद हिंदुस्तान की सेना ने यहां जीत हासिल की और चीन की सेना को वापस जाने पर मजबूर कर डाला। इस बड़ी जीत के नायक देश के एनएसए अजित डोभाल के साथ आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत भी हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर डोकलाम में भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत कही जा रही है । अब सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या हो गया था कि चीन को डोकलाम से अपने कदम वापस खींचने पड़े थे ? तो इसका जवाब हम आपको दे रहे हैं। भारत की इस बड़ी जीत में भारतीय सेना का सबसे बड़ा हाथ है। इस बारे में भी हम आपको बता रहे हैं। बताया जा रहा है कि आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने मोदी सरकार को भरोसा दिया था कि भारतीय सेना चीन को माकूल जवाब देने के लिए तैयार है।
इसके साथ ही जनरल रावत के द्वारा कहा गया था कि इस वक्त इंडियन आर्मी चीन की सेना से बेहतर पोजीशन पर है और किसी भी हमले का करारा जवाब दे सकती है। दरअसल चीन की हरकतों के बाद इंडियन आर्मी ने डोकलाम बॉर्डर इलाके में अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली थी। सिक्किम के जिस बॉर्डर इलाके में विवाद चल रहा था, वहां चीन के मुकाबले भारतीय सेना का मूवमेंट ज्यादा बेहतर था। ये देखकर ही चीन ने अपने कदम वापस खींच लिए थे। डोकलाम भूटान का इलाका है, लेकिन चीन इसपर अपना अधिकार जमाता है। सूत्रों का कहना है कि समुद्र तट से 10,000 फीट ऊंचे इस इलाके में इंजियन आर्मी काफी सतर्क पोजीशन में हैं। भारतीय सेना यहां कोई भी ढील देने के मूड में नहीं है। सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि आर्मी चीफ बिपिन रावत ने सरकार को भरोसा दिलाया था कि वो चीन को मुंहतोड़ जवाब देने लिए सक्षम हैं।
इसके साथ ही उन्होंने सरकार को भरोसा दिया था कि डोकलाम में भारतीय सेना चीन को बड़ा नुकसान पहुचाने का दम भर रही है। भारतीय सेना की ये तैयारी भारत को चीन पर कूटनीतिक जीत दिलाने में मददगार साबित हुई। डोकलाम विवाद के बाद चीन की मीडिया की तरफ से भारी दबाव बनाया जा रहा था कि चीन कभी भी बड़ा फैसला ले सकता है। लेकिन ये बात खुद चीन भी जानता था कि इस वक्त भारतीय सेना से लड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा है। भारत ने भी किसी भी मोर्चे पर अपने कदम पीछे नहीं हटाए। इस वजह से चीन को अपनी सेना वापस बुलाने का फैसला लेना पड़ा। डोकलाम हिंदुस्तानस चीन और भूटान बार्डर के तिराहे पर मौजूद है। ये जगह भारत के नाथुला पास से 15 किलोमीटर की दूरी पर है। इस वजह से सामरिक लिहाज से ये जगह भारत के लिए काफी अहम है।