पहाड़ी शेर की हुंकार का असर देखिए, मोदी के जाते ही डोकलाम भूला चीन
Sep 5 2017 3:28PM, Writer:हैदर
यूं तो पीएम मोदी के ब्रिक्स समिट दौरे से कुछ दिन पहले ही ये खबर सामने आ गई थी चीन ने डोकलाम से अपनी सेना वापस बुला ली है। जब मोदी चीन की धरती पर पहुंचे पर बहुत कुछ खास दिखा। जिनपिंग और मोदी की एक खास मुलाकात रंग लेकर आई है। ब्रिक्स समिट के तीसरे दिन मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई। दोनोम के बीच इस मुलाकात में द्विपक्षीय बातचीत हुई। इस मुलाकात में कई मुद्दों पर बातचीत हुई है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि मोदी और जिनपिंग के बीच ये मुलाकात करीब 1 घंटे तक चली है। डोकलाम को लेकर काफी बातचीत हुई और आखिरकार ये नतीजा निकला कि डोकलाम जैसी स्थिति पैदा ना हो। इसके साथ ही चीन का कहना है कि वो भारत के साथ पंचशील सिद्धांत पर काम करेगा। आतंकवाद के खात्मे को लेकर भी पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच बातचीत हुई है।
बताया जा रहा है कि इस मुलाकात से पहले ही भारत के एनएसए अपना काम कर चुके थे। डोभाल ही वो शख्स हैं, जिन्होंने मोदी के दौरे से पहले चीन में शह और मात का खेल खेला। डोभाल पहले ही डोकलाम को लेकर सारी अड़चनों को खत्म कर चुके थे। बस अब इंतजार मोदी के ब्रिक्स समिट दौरे का था। मोदी ने चीन में जाकर डोकलाम के सारे विवादों को आखिरकार जड़ से खत्म कर डाला है। अब माना जा रहा है कि चीन नई तरीके से भारत से दोस्ती के कदम बढ़ाएगा। विदेश मंत्रालय का कहना है कि ये मुलाकात काफी मायनों में अहम रही है। आज चीन जानता है कि भारत की ताकत क्या है। हालात अब 1962 वाले बिल्कुल भी नहीं हैं, ऐसे में भारत एक उभरती हुई ताकत बन रहा है और इस बात से चीन अच्छी तरह से वाकिफ है। आज चीन के लिए सबसे बड़ी मुश्किल है उसका बिजनेस।
चीन जानता है कि उसका बिजनेस तभी आगे बढ़ेगा, जब तक कि इसमें भारत का सहयोग ना मिले। ऐसे में इस मुश्किल से निपटने के लिए भी चीन का भारत सरकार के साथ बात करना जरूरी था। आखिरकार वो पल आ ही गया। लेकिन चीन को अपने बिजनेस के बारे में बात करने से पहले डोकलाम पर बात करना जरूरी था। इन तमाम विवादों को विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने पर बात बन गई है। चीन द्वारा कहा गया है कि अब मतभेदों को विवाद नहीं बनने दिया जाएगा। बॉर्डर पर शांति, रक्षा और सुरक्षा पर आपसी सहयोग से सहमति बनी। दोनों नेताओं के बीच ब्रिक्स के मुद्दों पर बातचीत हुई। दोनों मुल्कों ने इस बार इस बैठक में 'प्रगतिशील दृष्टिकोण' अपनाया। इसके साथ ही चीन की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण की सराहना की गई। चीन के राष्ट्रपति के तेवर इस मुलाकात के दौरान काफी बदले हुए थे।