image: Uttarakhand boy ashish dabral is the new idol for every pahadi

इस उत्तराखंडी से सीखिए लड़ने का जज्बा, गांव का ये लड़का इतिहास रच रहा है

Sep 13 2017 3:25PM, Writer:सूरज

हर बार कहा जाता है कि हाथ पर हाथ रखकर बैठने वाले जिंदगी में कभी आगे नहीं बढ़ पाते। जिसने अपनी जिंदगी में ऐसा फलसफा अपना, शायद वो जिंदगी में कभी आगे नहीं बढ़ पाया। पलायन आज उत्तराखंड के लिए विकराल समस्या बन गई है। लेकिन सिर्फ पलायन की बात करना और पलायन के खिलाफ जंग लड़ने में बहुत फर्क होता है। ये फर्क एक गांव के लड़के ने दुनिया को समझाया है। इस युवा का नाम है आशीष डबराल, ये है असली हिम्मतवाला पहाड़ी। मल्टीनेशनल कंपनी ब्रिटिश टेलीकॉम में काम करता है, साढ़े 12 लाख रूपये साल भर में कमाता है लेकिन दिल में अपनी मातृभूमि के लिए जज्बा जगा है। वो हर हाल में उत्तराखंड से पलायन नाम के राक्षस का समूल नाश कर देना चाहता है। सबसे पहले आपको ये बता दें कि आशीष हर वीकएंड पर उत्तराखंड में अपने गांव आते हैं।

वहां बच्चों को पढ़ाते हैं, खेती के नए और उन्नत तरीकों से लोगों को रूबरू कराते हैं। अब हम जो आपको बताने जा रहे हैं , उससे आप हैरान हुए बिना नहीं रह पाएंगे। इस शख्स ने ना जाने कितने सालों से बंजर पड़ी 25 नाली जमीन पर 1200 किलो गोभी उगा डाली। इसके साथ ही इस लड़के ने रोजगार के नए तरीके से गांव वालों को अवगत करा दिया। आज जिस गांव में पलायन की मार पड़ रही थी, उस गांव में रोजगार भी है और लोगों को खुद पर भरोसा होने लगा है। आशीष डबराल ने दादा ने 1882 में एक स्कूल खोला था। बीच में तो ये स्कूल ठूक ठाक चला लेकिन एक वक्त ऐसा आया कि पलायन की वजह से यहां सिर्फ 3 छात्र रह गए। इस स्कूल को तिमली विद्यापीठ नाम दिया गया है। आशीष ने मन में संकल्प लिया कि चाहे कुछ हो जाए, इस स्कूल के सम्मान को एक बार से जीवित करेंगे।

उन्होंने स्कूल को ऑनलाइन जोड़ने के लिए इग्लैंड से मदद ली। कुछ संस्थाएं उनके स्कूल के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाना चाहती हैं। इसके बाद आशीष अपने स्कूल के बच्चों को दिल्ली शहर घुमाने भी ले गए हैं। ताकि बच्चों को ये दिखा सकें कि पहाड़ से पढ़कर आए युवा इन शहरों में कैसे रहते हैं। स्कूल में आशीष ने कम्प्यूटर लैब शुरू की, सेमीनार करवाए और आज ये स्कूल उत्तराखंड के टॉप स्कूलों में गिना जा रहा है।आशीष ने अपने बच्चों को भी इसी स्कूल में भर्ती कराया है। ये है वो जज्बा जो आज हर उत्तराखंडी के दिल में होना चाहिए। आशीष गांव के युवाओं को स्वाबलम्बी बनाने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा मशरूम की खेती और पॉलीहाउस जैसे काम भी कर रहे हैं। आशीष की तारीफ में सीएम त्रिवेंद्र ने लिखा है कि ‘कुछ किए बिना जय जय कार नहीं होती। कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।’


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