image: Pandavaas new video about chandra kunvar bartwal

Video: उत्तराखंड के ये तीन लड़के इतिहास रच रहे हैं, इस काम पर हर पहाड़ी को गर्व होगा !

Sep 15 2017 2:58PM, Writer:कपिल

कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो कभी भुलाई नहीं जाती। तो लीजिए पांडवाज एक बार फिर से देवभूमि के लिए नायाब तोहफा लेकर आए हैं। वो तोहफा जिनमें कवि चंद्र कुंवर बर्त्वाल जी की कविताएं जी उठी हैं। इस वीडियो में आपके लिए बहुत कुछ है। आप जान सकेंगे कि उस वक्त उत्तराखंड में ऐसी एक शख्सियत थी, जो अपनी कलम की धार से इतिहास रचती थी। पांडवाज क्रिएशन एक बार फिर से ये ऐतिहासिक वीडियो सिर्फ उत्तराखंड के लिए लेकर आए हैं। ईशान डोभाल, कुणाल डोभाल और सलिल डोभाल ने एक बार फिर से अपने हुनर की बानगी पेश की है। इस वीडियो के जरिए आपको ये याद दिलाने की कोशिश की गई है कि जिस दौर में देश में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जैसे महान कवि हुए थे, उसी दौर में उत्तराखंड के एक कवि थे, जिनकी तारीफ खुद सूर्यकांत त्रिपाठी निराला करते थे।

इतिहास के कुछ पन्ने हमारी आखों के सामने खुले हैं, उन पन्नों में छुपी उत्तराखंड की कुछ यादें और उन यादों में सांसें लेता एक महान कवि। एक कवि जिसे शायद आज उत्तराखंड भूल चुका है, पांडवाज की ओर से इस कवि के लिए ये सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हिमवंत कवि चन्द्र कुंवर बर्त्वाल। वो कवि जो इस दुनिया में सिर्फ 28 साल तक जिए, लेकिन इतने सालों में ही ये कवि हिन्दी साहित्य और सौंदर्यवाद को एक नया जीवन दे गए थे। हिन्दी साहित्य के समीक्षकों की नजर में चन्द्र कुंवर बर्त्वाल कालिदास की तरह थे। 1931 का वो दौर देश नहीं भूल सकता, जब इस कवि की कविताओं को कर्मभूमि नाम की साप्ताहिक पत्रिका में जगह दी गई थी। उनकी ‘काफल पाको’ रचना को उस वक्त गीति काव्य की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में शामिल किया गया था। ऐसे थे उत्तराखंड में जन्म लेने वाले ये महान कवि।

इस वीडियो में इंद्रेश मैखुरी एक वाचक के तौर पर भूमिका अदा कर रहे हैं। वीडियो में बताया गया है कि वो दौर कैसा था जब चंद्र कुंवर बर्त्वाल जैसे कवि ने अपनी रचनाओं से देश को सोचने पर मजबूर कर दिया था। 20 अगस्त 1919 से 14 सितंबर 1947 तक के छोटे से जीवनकाल में इस कालजयी कवि ने कई रचनाएं देश को दी थी। उत्तराखण्ड के चमोली जिले के गांव मालकोटी, पट्टी तल्ला नागपुर से इस कवि ने देश में अलग ही पहचान बनाई थी। इंद्रेश मैखुरी एक बेहतरीन बात इस वीडियो में बता रहे हैं कि चंद्र कुंवर बर्त्वाल जिस प्रकृति के बीच रहते थे, वो ही प्रकृति उनकी रचनाओं में दिखाई देती है। पांडवाज के ईशान डोभाल ने राज्य समीक्षा से बात की है और कहा है कि चंद्र कुंवर बर्त्वाल को लोग भूलें नहीं, इसलिए वीडियो के माध्यम से उनकी कविता को दुनिया के सामने पेश किया गया है। उत्तराखंड के इस महान कवि को आप भी इस वीडियो के जरिए याद कीजिए।


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