उत्तराखंड के लिए बड़ी खबर, अब तुंगनाथ मंदिर से मिले बर्बादी के संकेत !
Sep 16 2017 3:18PM, Writer:कपिल
उत्तराखंड के पंचकेदारों में शुमार तुंगनाथ मंदिर को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम ने बड़ा खुलासा किया है। खुलासा नहीं बल्कि इसे खतरे का संकेत कहेंगे तो कोई गलत नहीं होगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का कहना है कि इस मंदिर पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने एक रिपोर्ट पर्यटन परिषद को सौंपी है। इस रिपोर्ट में ऐसी ऐसी बातें लिखी गई हैं कि आप भी हैरान रह जाएंगे। आपको हम सिलसिलेवार तरीके से बता रहे हैं आखिर ये रिपोर्ट क्या कहती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तुंगनाथ मंदिर की दीवारों पर दरारें उभर रही हैं। इससे पानी का रिसाव तेज हो रहा है। इसके साथ ही इस रिपोर्ट में कहा गया है कि तुंगनाथ मंदिर के गर्भगृह, महामंडप और कलश पर दरारें पड़ गई हैं और इनकी जल्द से जल्द मरम्मत करवानी होगी।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यानी एएसआइ ने अपनी रिपोर्ट पर्यटन परिषद को सौंप दी है। इसके अलावा भी इस रिपोर्ट में कई चिंताजनक बातें बताई गई हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि मंदिर की नींव के अलावा दीवारों पर लगे पत्थरों के बीच लगातार गैप बनता जा रहा है। पानी के रिसाव की वजह से मंदिर के सभा महामंडप और गर्भगृह के लिए खतरा पैदा हो रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का कहना है कि इस खतरे को टालने के लिए सबसे जरूरी ये है कि मरम्मत का काम जल्द से जल्द शुरू कर दिया जाए। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का कहना है कि बारिश के वक्त ये खतरा और भी ज्यादा बढ़ सकता है। इसके साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को सबसे ज्यादा चिंता बर्फबारी की है। एएसआइ के अधिकारियों का कहना है कि शीतकाल में यहां जमकर बर्फबारी होती है।
इसके साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का कहना है कि शीतकाल के दौरान मंदिर की सुरक्षा के लिए ये बर्फबारी सबसे बड़ा खतरा बन सकती है। पंच केदारों में तृतीय केदार के नाम से मशहूर तुंगनाथ का मंदिर की समुद्रतल ऊंचाई 3680 मीटर है। इस वजह से इसे एशिया का सबसे ऊंचा मंदिर कहा जाता है। ये मंदिर का वास्तुशिल्प का बेजोड़ उदाहरण पेश करता है। इस मंदिर को हिमाद्री शैली में तैयार किया गया है। एएसआइ की संरक्षण वास्तुकार कविता जैन ने मीडिया का इस बारे में कई बातें बताई हैं। उनका कहना है कि मंदिर में पानी का रिसाव लगातार हो रहा है। इस वजह से पैदा हुए खतरे और ट्रीटमेंट की प्लानिंग से जुड़ी हर रिपोर्ट पर्यटन परिषद को सौंपी गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का सुपरविजन कहता है कि इस मंदिर में ट्रीटमेंट का काम जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए।