उत्तराखंड में 2400 सरकारी स्कूल होंगे बंद, 5 हजार शिक्षकों को झटका, ये रही वजह !
Sep 16 2017 6:55PM, Writer:कपिल
उत्तराखंड के लिए इस वक्त की सबसे बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। राज्य के कई सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार घटती जा रही है। इसे लेकर सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है। हो सकता है कि आगे आने वाले वक्त में सरकार को इसे लेकर विरोध झेलना पड़े। उत्तराखंड में लगातार घटती छात्रों की संख्या ने तकरीबन 2400 सरकारी प्राइमेरी और उच्च प्राथमिक स्कूलों को बंदी की कगार प ला खड़ा कर दिया है। खबर है कि 10 या इससे कम छात्रों की संख्या वाले विद्यालयों को नजदीकी विद्यालयों में मिलाने के आदेश दे दिए गए हैं। हालांकि ये फॉर्मूला पहले राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में लागू हो चुका है और इसके परिणाम भी देखने को मिले हैं। विद्यालयी शिक्षा सचिव चंद्रशेखर भट्ट ने ये आदेश जारी किए हैं। फिलहाल इतना जरूर है कि एक बार फिर से ये मुद्दा गरमा सकता है।
एक रिपोर्ट कहती है कि इस फैसले से करीब पांच हजार शिक्षकों को भी झटका लग सकता है। इन सरप्लस शिक्षकों को भी नजदीकी विद्यालयों में खाली पदों पर समायोजित किया जाएगा। हालांकि नौकरी को लेकर कोई भी खतरा नहीं है। शिक्षा का एकीककरण दरअसल ऐसा नियम है, जिसमें कम छात्रों वाले स्कूल को नजदीकी स्कूल में समायोजित कर दिया जाता है। उत्तराखंड में सरकारी प्राइमेरी और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों की संख्या में हर साल गिरावट देखने को मिल रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह पलायन भी हो सकती है। उत्तराखंड केगठन के बाद से अब तक सरकारी प्राइमेरी स्कूलों में छात्रों की संख्या घटकर 50 फीसदी से भी कम हो गई है। पिछले महीने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के साथ शिक्षक संगठनों की बैठक हुई थी। इस बैठक में भी घटती छात्रसंख्या का मुद्दा उठा था।
मुख्यमंत्री ने कम छात्रों की संख्या वाले स्कूलों को नजदीकी विद्यालयों में विलीन करने के निर्देश भी दिए थे। सीएम त्रिवेंद्र रावत के निर्देशों के बाद प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की ओर से इस बारे में शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इन नियमों में आरटीई का भी ध्यान रखा गया है। 10 या इससे कम छात्रों की संख्या वाले स्कूलों को एक किलोमीटर की दूरी के अंतर्गत स्कूल उपलब्ध होने की दशा में एकीकरण करने के आदेश दिए हैं। निदेशालय को पहले ऐसे स्कूलों को चिह्निंत करने के लिए कहा गया है। एक रिपोर्ट कहती है कि उत्तराखंड में तकरीबन 2400 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों की संख्या 10 या इससे कम रह गई है। ऐसे में सरकार को ये फैसला लेना पड़ा है। खैर अब देखना है कि इस मुद्दे पर उत्तराखंड में राजनीति किस तरह से गर्माती है और सरकार किस तरह से इसका जवाब देती है।