image: Rudraprayag dm manlesh ghildiyal wife doing great job

उत्तराखंड के जांबाज डीएम की जांबाज पत्नी, पहाड़ों में जगा दी शिक्षा की अलख !

Sep 17 2017 1:50PM, Writer:कपिल

राज्य समीक्षा के लेखों में अक्सर हमारी ये कोशिश होती है कि आपको कुछ अलग और हटकर ऐसी स्टोरी से रूबरू कराएं जो आपको सूचना के साथ जीने के सलीके को भी सिखाए। इतना ही नहीं, कहानी ऐसी हो जो आपको जोश से लबरेज कर दे। आज हम पहाड़ की एक एसी ही सच्ची और अच्छी कहानी से आपको रूबरू कराएंगे। अपनी जिंदगी में आपने कई अधिकारियों और उनके परिवारों को शानो-शौकत से जीते देखा होगा। आप में से कुछ लोग ऐसे अधिकारियों की ज्यादती के शिकार भी हुए होंगे। लेकिन हम आज बात कर रहे हैं पहाड़ की एक ऐसी महिला, एक ऐसी जननी की जिसको उत्तराखंड ही नहीं पूरा देश सलाम कर रहा है। हमारी इस खास लेख में बात रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश घिल्डियाल की पत्नी ऊषा घिल्डियाल की, जिन्होंने अपने कर्मों से जमाने को सीख दी है। ऊषा घिल्डियाल के बारे में जो भी सुनता है, जो उनसे मिलता है, हमेशा के लिए उनका मुरीद बन जाता है।

जिन गांवों और जिन सुदूर इलाकों में कोई जाने से भी कतराता है। उन जगहों पर घिल्डियाल शिक्षा के लौ को जला रही हैं। वो डीएम की पत्नी हैं। जाहिर है उन्हें किसी चीज की कमी नहीं है। बावजूद इसके वो स्कूलों में जाती हैं और बच्चों को पढ़ाती हैं। रुद्रप्रयाग बालिका इंटर कॉलेज में पहले ऊषा घिल्डियाल ने छात्राओं की क्लास ली और अब बीते एक पखवाड़े से प्राथमिक विद्यालय में चौथी और पांचवीं क्लास के बच्चों को पढ़ा रही हैं। आपको जानकर ये हैरानी होगी कि घिल्डियाल पेशे से शिक्षक नहीं हैं। लेकिन जज्बा ऐसा जिसे देखकर पेशेवर शिक्षक उनके कायल हो गए हैं। ऊषा गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के साथ-साथ बच्चों को राजीव गांधी और जवाहर नवोदय समेत सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करा रही हैं। यही नहीं वो हर हफ्ते ज्वलंत मुद्दों पर बच्चों से डिबेट भी करवाती हैं ताकि बच्चे किसी भी मंच पर पीछे ना रहें, और जब भी जरुरत पड़े बच्चे देश के ज्वलंत मुद्दों पर बोल सकें और लोगों को समझा सकें।

ऊषा घिल्डियाल का डेली रूटीन उन शिक्षकों के लिए आइना है, जो आए दिन स्कूल से गायब रहते हैं या फिर स्कूल तो पहुंचे हैं और महज खानापूर्ति करके स्कूल से ऐसे गायब होते हैं जैसे गधे के सिर से सींघ। घिल्डियाल हर रोज सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक स्कूल में 4 से 5 कक्षाओं के छात्राओं को पढ़ाती हैं। ऐसा जज्बा और ऐसी लगन देश के किसी अधिकारी की पत्नी में शायद ही किसी ने देखी होगी। उत्तराखंड की इस बेटी पर आज हर किसी को नाज़ है। अबतक आपने पहाड़ कि इस खास बेटी के कर्मों के बारे में जाना। जिस बेटी का जमाना मुरीद है। लोग तारीफ करते नहीं थक रहे हैं, उनकी निजी जिंदगी से भी आपको परिचित कराते हैं। ऊषा घिल्डियाल उन खास शख्सियतों में से हैं जिन्होंने जमाने और चुनौतियों के सामने कभी हार नहीं मानी। परेशानियों से हारकर कभी उन्होंने हथियार नहीं डाला। जिधर भी वो चलीं लोगों को अपने कर्मों से प्रेरित करते चलती चली गईं।

ऊषा घिल्डियाल गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्व विद्यालय पंतनगर से प्लांट पैथोलॉजी में डाक्टरेट उपाधि धारक हैं। घिल्डियाल राबाइका रुद्रप्रयाग में 10वीं क्लास की छात्राओं को विज्ञान भी पढ़ा चुकी हैं। इस दौरान उन्होंने पाठ्यक्रम के साथ बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी प्रेरित किया। ऊषा घिल्डियाल की नेक सोच का आज जमाना कायल है। वो कहती हैं कि आने वाले दिनों में ग्रामीण स्कूलों में जाकर बच्चों को पढ़ाने का उनका इरादा है। कहते हैं जिनके इरादे अच्छे और सच्चे हों उन्हें काम करने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती। अधिकारी की बीवी होते हुए भी ऐशो-आराम की जिंदगी को छोड़कर शिक्षा की लौव जलाने वाली उत्तराखंड की इस बेटी को राज्य समीक्षा का सलाम। उम्मीद करता हूं ऊषा घिल्डियाल की ये अच्छी और सच्ची कहानी आपको बेहद पंसद आएगी। और अपनी जिंदगी में ऊषा घिल्डियाल से आप भी सीख लेंगे और अपने पहाड़ के लिए कुछ बेहतर करने के बारे में सोचेंगे।


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