image: kavindra bisht getting ready for olympic

उत्तराखंड के इस लाल पर देश को भरोसा, ओलंपिक से गोल्ड मेडल लाएगा पहाड़ी छोरा !

Sep 20 2017 5:50PM, Writer:सुनैना

राज्य समीक्षा के कई लेखों में हम आपको उत्तराखंड की उन प्रतिभाओं के बारे में बता चुके हैं, जो विश्व स्तर पर उत्तराखंड के साथ साथ देश का मान सम्मान बढ़ा रहे हैं। आज हम आपको उत्तराखंड के एक चमकते सितारे के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसके दमदार मुक्कों को आगे बड़े बड़े विरोधी चित हो जाते हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं कविंद्र सिंह बिष्ट की। ऐसा इसलिए क्योंकि कविंद्र सिंह बिष्ट भी हाल ही में भारत के उन 152 एलीट खिलाड़ियों में शामिल हुए हैं, जिन्हें टोक्यो ओलंपिक के लिए तैयारी करनी है। भारत सरकार द्वारा कविंद्र सिंह बिष्ट को हर महीने अपने खेल को और दमदार बनाने के 50 हजार रुपये मिलेंगे। इसके साथ ही एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ के लिए भी कविंद्र को तैयारी करनी है। हाल ही में वर्ल्‍ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कविंद्र सिंह बिष्ट देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

कविंद्र पिथौरागढ़ के पंडा गांव के रहने वाले हैं। इससे पहले अप्रैल में उजबेकिस्तान में हुई एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने क्वॉर्टर फाइनल तक का सफर तय किया था। उस दौरान कविंद्र ने 52 किग्रा वेट कैटेगरी में खेला था। शुरुआती दिनों में कविंद्र के दिल में फुटबॉल का जुनून उफान मार रहा था। गांव के छोटे से मैदान में वो फुटबॉल खेला करते थे। लेकिन इस बीच उन्हें धरम चंद के रूप में एक बेहतरीन बॉक्सिंग कोच मिला। धरम चंद ने कविंद्र को बॉक्सिंग खेलने के लिए लगातार प्रेरित किया। गुरु की प्रेरणा मिली तो कविंद्र ने फुटबॉल छोड़ा और बॉक्सिंग के ग्लब्स को अपने हाथों में थाम लिया। यहां से शुरू होता है कविंद्र के शआनदार करियर का सफर। कविंद्र ने साल 2009 में साई सेंटर काशीपुर में एडमीशन लिया। कोच एचएस संधू ने 2013 तक उन्हें बॉक्सिंग के पेचीदगियां सिखाई।

इसी दौरान कविंद्र ने ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल कर लिया। इसके साथ ही इस चैंपियनशिप में उन्हें बेस्ट बॉक्सर का खिताब मिला। इसके बाद कविंद्र स्टेट चैंपियन भी रहे। कविंद्र के पिता पिता आइटीबीपी में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। फिलहाल कविंद्र भारतीय सेना में हैं। उत्तराखंड बॉक्सिंग एसोसिएशन के मुताबिक कविंद्र एक जबरदस्त टैलेंट के धनी खिलाड़ी हैं। साउथ कोरिया में हुए वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स में भी कविंद्र अपने मुक्कों का दम दिखा चुके हैं। फिलहाल कविंद्र पटियाला में इंडिया कैंप में तैयारी कर रहे हैं। कविंद्र को अब भारत सरकार की तरफ से मदद मिल रही है। उनका कहना है कि आने वाले वक्त में इस बदौलत वो अपने खेल में और ज्यादा सुधार करेंगे। टोक्यो ओलंपिक को लेकर कविंद्र से काफी उम्मीदें हैं।


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