देवभूमि की ‘दंगल’ गर्ल, गरीबी से लड़ी, पिता से सीखी पहलवानी और रचा इतिहास !
Sep 27 2017 5:17PM, Writer:शैलजा
उत्तराखंड में ऐसी ऐसी प्रतिभाएं हैं, जिनके बारे में सुनकर गर्व होता है। ऐसी ही विलक्षण प्रतिभा की धनी हैं ये दो बहनें। इन दोनों बहनों में जिंदगी में हर मुश्किल को पार किया। जहां कुश्ती को लड़कों का खेल कहा जाता है, उसी कुश्ती में इन दोनों बहनों ने अपने दांव पेंच से मर्दों को भी हैरान कर दिया है। आपने आमिर खान की फिल्म दंगल देखी होगी, जिसमें एक पिता अपनी बेटियों को पहलवान बनाता है, ऐसी ही कहानी इन दो बहनों की हैं। हम बात कर रहे हैं कीर्तिस्ना और प्रीतिस्ना की, जो कि उत्तराखंड के रुड़की की रहने वाली हैं। इन दोनों बहनों ने अपने पिता से पहलवानी के दांव पेंच सीखे और आज विदेशों में उत्तराखंड का मान बढ़ा रही हैं। आर्थिक तंगी और सुविधाओं के अभाव के वबावजूद इन्होंने दंगल लड़ना नहीं छोड़ा। हार ना मानने की जिद इन दो बहनों को कॉमनवेल्थ तक ले आई।
साल 2011 में मेलबर्न में कॉमनवेल्थ रेसलिंग चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था। इस चैंपियन शिप में कीर्तिस्ना ने रजत पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया था। कीर्तिस्ना की छओटी बहन प्रीतिस्ना भी नेशनल लेवल पर आयोजित कई चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकी हैं। आज उत्तराखंड की बेटियों के लिए ये बेटियां प्रेरणास्रोत बन गई हैं। इन दोनों बहनों ने अपने पिता पहलवान ओमवीर सिंह से पहलवानी के दाव-पेंच सीखे। हालांकि बचपन से इन्हें पहलवानी का शौक नहीं था। घर की परिस्थितियां ऐसी नहीं थी कि आगे की पढ़ाई कर सकें। इसलिए इन बहनों के पिता ने इन्हें कुश्ती सीखने की सलाह दी। दोनों ने कोई सवाल-जवाब किए बिना पापा से ही ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी। जिस वक्त इन दोनों ने ये फैसला लिया तो गांव वालों के कई ताने सुनने पड़े। गांव वाले बहुत कुछ कहते थे।
पिता को गांव वाले कहते थे कि ‘तुम्हारा कोई बेटा नहीं है तो बेटियों को ही कुश्ती में डाल दिया, ये कैसा पागलपन है ?’ इन सब बातों की तरफ इन बहनों और पिता ओमवीर ने कभई ध्यान ही नहीं दिया। जब 2004 में एक बहन ने राष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती में पहला मेडल हासिल किया तो गांव वालों की बोलती बंद हो गई। कीर्तिस्ना इटंरनेशनल लेवल पर अब तक दो पदक हासिल कर चुकी हैं। साल 2009 में कीर्तिस्ना ने क्यूबा में रजत पदक जीता। इसके बाद 2011 में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित कॉमनवेल्थ रेसलिंग चैंपियनशिप की विजेता बनी। बड़ी बहन के नक्शे कदम पर चलकर प्रीतिस्ना भी राष्ट्रीयनेशनल लेवल पर कई चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकी हैं। पहलवान ओमवीर सिंह का कहना है कि आज लड़के और लड़कियों में जिस तरह से फर्क किया जाता है, वो गलत है। लड़कियों किसी भी मामले में लड़कों से कम नहीं हैं।