image: Manish rawat won bronze medal in national championship

उत्तराखंड पुलिस के जवान का जलवा, गांव के लड़के ने नेशनल चैंपियनशिप में जीता मेडल !

Sep 28 2017 6:13PM, Writer:कपिल

उत्तराखंड पुलिस के जवान मनीष रावत के बारे में तो आप जानते ही होंगे। हाल ही में मनीष रावत को भारत सरकार द्वारा ओलंपिक की तैयारियों के लिए इलीट 152 खिलाड़ियों में शामिल किया गया था। सरकार द्वारा मनीष को हर महीने 50 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसकी तैयारी भी मनीष अच्छी तरह से कर रहे हैं। हाल ही में चेन्नई में आयोजित हुई ओपन नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मनीष ने एक बार फिर से उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। 20 किमी की वॉक रेस में उत्तराखंड पुलिस के मनीष रावत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता है। मनीष रावत चमोली के रहने वाले हैं और ऑल इंडिया पुलिस टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस रेस में पहले तीन स्थानों पर रहे तीनों ही रेसर ओलंपियन हैं। मनीष ने 20 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए एक घंटा 28 मिनट और 34 सेकेंड में रेस पूरी की।

हालांकि मलाल ये रहा कि वो सिर्फ 4 सेकेंड के अंतराल से रजत पदक से चूक गए। इस रेस में उत्तराखंड के ही चंदन सिंह ने पांचवां स्थान हासिल किया है। मनीष रावत, जो इससे पहले रियो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। लेकिन उस वक्त वो अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाया थे। अब एक बार फिर से वक्त आ गया है खुद को साबित करने का। भारत सरकार ने 152 खिलाड़ियों की लिस्ट तैयार की है। इस लिस्ट में मनीष रावत का नाम भी है। इस बार मनीष के हौसलों को कोई नहीं रोक सकता। आगे बढ़ना है और हर हाल में जीत हासिल करनी है। मनीष की कहानी जानकर आप बार बार ये सोचेंगे कि जब एक वेटर का काम करने वाला लड़का इस बड़े मुकाम पर पहंच सकता है, तो फिर वो लोग क्यों नहीं जो हाथ पर हाथ धरकर दूसरे को कोसने का ही काम करते हैं।

बदरीनाथ के एक होटल में मनीष रावत वेटर का काम करते थे। राजकीय इंटर कॉलेज बैरागना में पढ़ाई की। ये स्कूल घर से 7 किलोमीटर दूर था। यानी एक दिन में 14 किलोमीटर का सफर तो ऐसे ही हो जाता था। 2002 में पिता की मौत हुई तो पूरे परिवार की जिम्मेदारी इनके ऊपर आ गई। खेतीबाड़ी के साथ-साथ हर वो काम किया, जिससे कुछ पैसे मिल जाएं। 2006 में बदरीनाथ के एक होटल में वेटर का काम किया। दूध बेचा और यात्रियों के साथ गाइड बनकर रुद्रनाथ गए। इस दौरान उनकी मुलाकात कोच अनूप बिष्ट से हुई, जो गोपेश्वर स्टेडियम में कोच थे। उनके कहने पर ही मनीष ने पढ़ाई के लिए गोपेश्वर में एडमिशन ले लिया। 2011 में उन्हें पुलिस में खेल कोटे में जॉब मिली। एक बार फिर से मनीष ने नेशनल चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। मनीष का सपना है कि वो देश के लिए ओलंपिक मेडल जीतें।


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