image: Colonel ajay kothiyal to renovate dhari devi temple

देवभूमि की मां धारी देवी नए रूप में दिखेंगी, 6 महीने के भीतर ऐसा काम करेगा ये आर्मी ऑफिसर !

Sep 29 2017 8:17PM, Writer:शैलजा

उत्तराखंड के जांबाज कर्नल अजय कोठियाल के बारे में तो आप जानते ही होंगे। ये वो कर्नल हैं, जिन्होंने तय वक्त के भीतर ही केदारनाथ में पुननिर्माण करा दिया था। आज केदारपुरी नए रूप में चमक रही है और देश दुनिया से सभी का ध्यान खींच रही है। लेकिन अब कर्नल कोठियाल को एक बड़ी जिम्मेदारी मिली है। मां धारी देवी में पुनर्निर्माण होने जा रहा है। बताया जा रहा है कि अगले 6 महीने के भीतर यहां सालों से रुका काम पूरा हो जाएगा। इसके लिए निम की टीम को जिम्मा सौंपा गया है, जिसके प्रिंसिपल कर्नल कोठियाल ही हैं। आईआईटीयन के सी कुड़ियाल भी इसमें मदद करेंगे। इस मंदिर को कत्यूरी शैली में सजाने का काम शुरू हो गया है। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के निर्माण की वजह से मां धारी देवी का पुराना मंदिर झील में डूब गया था। इसके बाद जीवीके कंपनी द्वारा झील के बीच में नया मंदिर बनवाया गया था।

बीचे 5 सालों से इसका काम पूरा नहीं हो पाया है। लेकिन अब इसकी जिम्मेदारी कर्नल कोठियाल ने संभाली है। इस मंदिर को कत्यूरी शैली में सजाने का काम भी शुरू हो गया है। 1 करोड़ 70 लाख रुपये की लागत से इस मंदिर को सजाने का काम चल रहा है। बांध की झील के ठीक बीचों-बीच अब नए मंदिर का निर्माण चल रहा है। भारत में कई चमत्कारों के बारे में आपने सुना होगा। ऐसा ही एक चमत्कार धारी देवी के मंदिर में भी देखने को मिलता है। इस मंदिर में देवी माता दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है। लेकिन इनका गुस्सा भी किसी से छुपा नहीं है। कहते हैं केदारनाथ में आया प्रलय धारी देवी के गुस्से का ही नतीजा था। देवभूमि उत्तराखंड के रक्षक के रूप में धारी देवी को जाना जाता है। इस मंदिर में रोजाना माता तीन रूप बदलती है। मां प्रात:काल कन्या, दोपहर में युवती और शाम को वृद्धा का रूप धारण करती हैं।

पौराणिक धारणा के अनुसार एक बार भयंकर बाढ़ में कालीमठ मंदिर बह गया था। लेकिन धारी देवी की प्रतिमा एक चट्टान से सटी होने के कारण धारो गांव में बह कर आ गई थी। गांववालों को धारी देवी की ईश्वरीय आवाज सुनाई दी थी कि उनकी प्रतिमा को वहीं स्थापित किया जाए। जिसके बाद गांव वालों ने माता के मंदिर की स्थापना वहीं कर दी। पुजारियों के अनुसार मंदिर में माँ काली की प्रतिमा द्वापर युग से ही स्थापित है। कालीमठ एवं कालीस्य मठों में माँ काली की प्रतिमा क्रोध मुद्रा में है, परन्तु धारी देवी मंदिर में काली की प्रतिमा शांत मुद्रा में स्थित है।लेकिन शांत मुद्रा में दिखने वाली धारी माता के गुस्से को दुनिया ने उस वक्त देखा, जब एकाएक देवभूमि पानी में समा गई। धारी देवी को मां शक्ति के रूप महाकाली के रूप में पूजा जाता है। मान्यता अनुसार मां धारी उत्तराखंड के चारधाम की रक्षा करती है। इस देवी को पहाड़ों और तीर्थयात्रियों की रक्षक देवी माना जाता है।


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