उत्तराखंड: फर्जी डिग्री के सहारे बनी थी प्रवक्ता, SIT जांच में बड़ा खुलासा.. अब होगी सेवा समाप्ति और वेतन वसूली
हरिद्वार के धनौरी स्थित नेशनल इंटर कॉलेज में कार्यरत इतिहास प्रवक्ता रेनू कुमारी की एमए डिग्री एसआईटी जांच में फर्जी पाई गई है। शिक्षा विभाग ने सेवा समाप्ति और वेतन वसूली की कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
Jun 25 2026 6:02PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
जनपद हरिद्वार के धनौरी स्थित नेशनल इंटर कॉलेज में कार्यरत इतिहास प्रवक्ता रेनू कुमारी एक गंभीर विवाद में घिर गई हैं। विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में उनकी एमए इतिहास की डिग्री फर्जी पाए जाने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। विभागीय अधिकारियों ने मामले को गंभीर मानते हुए कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
Fake MA Degree Exposed: History Lecturer Faces Action After SIT Probe
जानकारी के अनुसार, गांव कोटा मुरादनगर निवासी रेनू कुमारी पर फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर शिक्षा विभाग में नियुक्ति प्राप्त करने का आरोप लगा था। मामले की जांच एसआईटी और अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) द्वारा की गई। जांच के दौरान शिक्षिका के हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, बीए और एमए समेत सभी शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि रेनू कुमारी द्वारा प्रस्तुत एमए इतिहास की डिग्री हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित मानव भारती विश्वविद्यालय से जारी बताई गई थी, लेकिन सत्यापन के दौरान यह डिग्री फर्जी पाई गई।
एसआईटी ने अपनी जांच पूरी करने के बाद संबंधित शिक्षिका के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की सिफारिश की। इसके बाद अपराध अनुसंधान विभाग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को भेज दी। महानिदेशक कार्यालय ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए निदेशक माध्यमिक शिक्षा को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए। बाद में यह प्रकरण मुख्य शिक्षा अधिकारी हरिद्वार को भेजा गया, जहां नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आगे पढ़िए..
मुख्य शिक्षा अधिकारी नरेश कुमार हल्दियानी ने बताया कि मामले की पूरी जानकारी प्राप्त करने और दस्तावेजों की समीक्षा के लिए नेशनल इंटर कॉलेज धनौरी के प्रबंधक को सभी संबंधित अभिलेखों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, शिक्षिका रेनू कुमारी को भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया गया है। विभाग मामले में उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अंतिम निर्णय लेगा।
सेवा समाप्ति और वेतन वसूली की कार्रवाई संभव
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार यदि आरोपों की पुष्टि अंतिम स्तर पर हो जाती है तो संबंधित शिक्षिका की सेवा समाप्ति के साथ-साथ नियुक्ति के बाद प्राप्त वेतन की वसूली की कार्रवाई भी की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी सेवा प्राप्त करने के मामलों में विभागीय कार्रवाई के अलावा कानूनी कार्रवाई भी संभव होती है।
2017 से चल रही है शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की विशेष जांच
गौरतलब है कि वर्ष 2017 में उत्तराखंड सरकार ने शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की व्यापक जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। इसी अभियान के तहत राज्यभर के शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। रेनू कुमारी का मामला भी इसी विशेष जांच अभियान के दौरान सामने आया है। अब सभी की नजर शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।