image: Kedarnath is in danger again says geologist

केदारनाथ में फिर आ सकता है सैलाब, वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा, जानिए क्यों ?

Oct 10 2017 1:59PM, Writer:कपिल

केदारनाथ की वो आपदा तो आपको अच्छी तरह से याद होगी, जब देवभूमि में हाहाकार मच गया था। पानी में बहते लोग, घर और लगातार उमड़ते सैलाब का वो मंजर आज भी आंखों के सामने आता है तो कलेजा कांप जाता है। लेकिन सवाल ये है कि क्या सब कुछ खत्म हो गया ? हाल ही में एक बार फिर से केदार को लेकर वैज्ञानिकों ने बड़ा खुलासा किया है।वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो साल 2013 जैसी महाप्रलय दोबारा आ सकती है। दैनिक अखबार अमर उजाला में भी इस खबर को प्रमुखता से जगह दी गई है। दरअसल केदारनाथ क्षेत्र में अंधाधुंध निर्माण कार्य चल रहा है। इसे लेकर एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूविज्ञानी प्रोफेसर एमपीएस बिष्ट ने इस पर सवाल उठाए हैं। उनका एवलांच शूट के मुहाने पर किए जा रहे निर्माण कार्यों पर सवालिया निशान लगाए हैं।

उन्होंने चेतावनी दी है कि जिस तरह से केदार में हो रहा है, वो विनाश को दोबारा न्यौता दे रहा है। प्रोफेसर का कहना है कि साल 2013 के महाविनाश से सरकारों ने किसी भी तरह का सबक नहीं लिया। इसके साथ ही उनका कहना है कि केदारनाथ हो या गौरीकुंड-पैदल मार्ग, हर जगह अवैज्ञानिक तरीके से ग्लेशियर द्वारा लाए गए गाद के ऊपर और एवलांच शूट के मुहाने पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। उनका मानना है कि ये एक विस्फोटक स्थिति की तरह है। इस तरह से आपदा को दोबारा आमंत्रण दिया जा रहा है। इससे पहले खुद प्रोफेसर बिष्ट ने केदारनाथ का दौरा किया था। वहां से लौटने के बाद उन्होंने अमर उजाला को ये सारी बातें बताई थी। उनका कहना है कि केदारनाथ दोनों तरफ पहाड़ियों से ग्लेशियर द्वारा लाए गए गाद पर बसा है। केदारनाथ से रामबाड़ा तक की प्रकृति लगभग समान है।

दरअसल गाद को मिट्टी और कंकड़ का मिश्रण कहा जाता है। इनके बीच मजूबत जुड़ाव नहीं होता है। जब भी इसमें पानी का रिसाव होता है तो लूज मैटरियल बह जाता है। इसका सीधा नतीजा भूस्खलन जैसी आपदा होती है। उनका कहना है कि गाद के ऊपर ही निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इसके अवावा एवलांच के मुहाने पर निर्माण कार्य चल रहे हैं। यानी ये खतरा दोहरा है। उनका कहना है कि पहले केदारनाथ में सीधे हिमपात ही होता था। इसके बाद ग्लेशियर धीरे-धीरे पिघलते थे और इसका पानी नुकसान नहीं पहुंचाता था। लेकिन लगातार बढ़ता तापमान की वजह से अतिवृष्टि हो रही है। इससे एवलांच शूट खतरनाक हो गए हैं। उनका कहना है कि बारिश का पानी एवलांच शूट के जरिए तेजी से गाद में आएगा और सब कुछ बहाकर ले जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने सरकार को सुझाव दिया है कि केदारपुरी में एवलांच शूट के मुहाने पर हो रहे निर्माण कार्य रुकवाएं।


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