देवभूमि में फिर खेला गया घिनौना खेल, शिक्षकों पर छात्राओं से छेड़खानी का आरोप !
Oct 14 2017 7:08PM, Writer:कपिल
शिक्षक एक नाम होता है आदर और सम्मान का। छात्रों को सही रास्ते पर ले जाने वाले शिक्षक को देवता से कम नहीं कहा गया है। लेकिन तब क्या होगा, जब शिक्षक ही भक्षक बन जाए ? तब क्या होगा, जब छात्रों के लिए गुरू का अवतार ही राक्षस बन जाए ? तब क्या होगा जब छात्रों का सत्य का मार्ग दिखाने वाला शिक्षक ही शैतान बन जाए ? उत्तराखंड में हो रही एक घटना की भी चारों तरफ निंदा हो रही है। उत्तराखंड में एक बार फिर से शर्मसार हुआ है। एक स्कूल की करीब 6 से ज्यादा छात्राओं ने दो शिक्षकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप हैं कि दोनों शिक्षकों ने छात्राओं से जमकर छेड़खानी की। जी हां हम बात कर रहे हैं रामनगर के गौजानी की। गौजानी के राजकीय इंटर कॉलेज में आधा दर्जन के करीब छात्राओं ने शिक्षकों पर ही छेड़खानी का आरोप लगाया है। इस आरोप के बाद स्कूल में हंगामा खड़ा हो गया।
मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस को बीच बचाव करना पड़ा। आरोपी शिक्षकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी चल रही है। अब जरा सिलसिले वार तरीके से समझिए कि आखिर इस स्कूल में क्या हुआ था। शनिवार को गौजानी इंटर कॉलेज की छात्राओं ने दो टीचर्स के खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत की। लेकिन मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद इस मामले की जानकारी पीड़ित छात्राओं ने परिजनों को दी। इसके बाद परिजनों ने स्कूल पहुंचकर हंगामा खड़ा कर दिया। मामला इतना बढ़ गया कि स्कूल प्रशासन ने पुलिस को बुला लिया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद ये मामला शांत हो सका। एसएसआई कवीन्द्र शर्मा का कहना है कि पीड़ित छात्राएं शिक्षिकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी कर रही हैं। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद शिक्षकों पर कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर कहें तो देवभूमि एक बार फिर से शर्मसार हुई है।
सवाल ये भी है कि आखिर कब तक उत्तराखंड में ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ती जाएंगी ? क्यों ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लग रही है ? कभी 4 साल की मासूम के साथ बलात्कार, कभी स्कूल जाने वाली लड़कियों के साथ छेड़छाड़ और यहां तक कि महिलाओं की इज्जत भी अब सुरक्षित नहीं रह गई है। अगर इन शिक्षकों पर आरोप साबित हो जाते हैं तो क्या एक बार फिर से हमें सोचना चाहिए ? वक्त आ गया है कि सरकार द्वारा ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। कुछ वक्त पहले आपको याद होगा कि ऐसा ही किस्सा देहरादून के एक स्कूल में भी हुआ था। उस स्कूल की सभी छात्राओं ने स्कूल के मैनेजर पर ही यौन शोषण के आरोप लगा दिए थे। इसके बाद स्कूल पर ही तुरंत कार्रवाई कर दी गई थी। आखिर कब बेटियों को बेटियों की तरह सम्मान दिया जाएगा। यक्ष प्रश्न कई हैं, लेकिन लगता है कि इन यक्ष प्रश्नों का दवाब देने के लिए देवभूमि में कोई युधिष्ठिर नहीं है।