पहाड़ी शेर पर पीएम मोदी को पूरा भरोसा, ‘ऑपरेशन क्लीन’ को तैयार जनरल रावत !
Oct 23 2017 4:03PM, Writer:रविंद्र
इंडियन आर्मी कश्मीर में हर हरकत पर नजर बनाए हुए है। साफ हो रहा है कि भारतीय सेना का इरादा ऑपरेशन क्लीन है। कश्मीर की वादियों में एक बार फिर से शांति बहाल हो, कश्मीर में पर्यटन की संभावनाएं बढ़ें और एक बार फिर से धरती की ये जन्नत फले-फूले, इसके लिए भारतीय सेना लगातार काम कर रही है। लेकिन इस बीच कट्टरपंथियों की वजह से सेना का काफी नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। ऐसे में इंडियन आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने एक बार फिर से कट्टरपंथ का झंडा बुलंद करने वालों को कड़ा संदेश दिया है। जनरल रावत का कहना है कि कश्मीर में कट्टरपंथ की समस्या का समाधान काफी गंभीरता से किया जा रहा है। इसके लिए सेना लगातार काम कर रही है। कट्टरपंथी जिस तरह से युवाओं को बरगला रहे हैं और पत्थरबाज़ बना रहे हैं, उसका खामियाजा उन्हें जल्दी ही भुगतना पड़ेगा।
इससे पहले भारतीय सेना साफ कर चुकी है कि आतंकवादी गतिविधियों में अब कुछ कमी देखी जा रही है। दरअसल भारतीय सेना को पहले ही आदेश दिया जा चुका है कि घुसपैठ की कोशिश करने वाले को मौके पर ही खत्म कर दिया जाए। इससे आतंकवाद नहीं पनपेगा। उधर पहले ही भारतीय सेना को खबर मिल चुकी थी कि बॉर्डर के पार आतंकवादियों के कैंप चल रहे हैं। कई तरह से इन कोशिशों का खात्मा कर दिया गया है। अब बारी कट्टरपंथ का झंडा बुलंद करने वालों की है। जनरल रावत का कहना है कि कट्टरपंथ और पत्थरबाजों के बढ़ने के लिए सोशल मीडिया भी काफी हद तक जिम्मेदार है। उनका कहना है कि कट्टरपंथ पूरी दुनिया में अपने पैर पसार रहा है। इसलिए भारतीय सेना इस पर काफी गंभीरता से विचार कर रही है और इससे निपट रही है। रावत ने कहा ये सुनिश्चित करने का कोशिश की जा रही है कि लोग इससे दूर रहें।
इतना जरूर है कि भारतीय सेना ने एक बार फिर से अपना टारगेट सेट कर दिया है। भारतीय सेना की कमान जनरल बिपिन रावत के हाथ में है। ये कहा जाता रहा है कि जनरल रावत अपने फैसलों से कभी भी पीछे नहीं हटते। जनरल रावत डंके की चोट पर कोई फैसला लेते हैं। चाहे आतंकवादियों के खात्मे की बात हो, या फिर डोकलाम का ही मुद्दा क्यों ना हो। हर बार जनरल रावत के कड़क फैसलों की वजह से भारतीय सेना ने अपने शौर्य का परिचय दिया है। अब कट्टरपंथियों पर अंकुश लगाने के लिए सेना लगातार काम कर रही है। माना जा रहा है कि इस तरह से जल्द ही कश्मीर में पत्थरबाजी जैसी घटनाओं पर रोक लग सकेगी। दरअसल इस वक्त कट्टरपंथी भी एक बड़ी समस्या बन रहे हैं। वो लगातार नए नए तरीकों से युवाओं को अपना शिकार बना रहे हैं और मौत के मुंह में धकेल रहे हैं।