देवभूमि का सिंघम, फिर से पहाड़ी बच्चों के लिए देवदूत बना ये जिलाधिकारी
Oct 24 2017 6:23PM, Writer:सुदीक्षा
उत्तराखंड का रुद्रप्रयाग जिला, जिसकी कमान मंगेश घिल्डियाल जैसे जिलाधिकारी के पास है। ये वो जिलाधिकारी हैं, जो बच्चों के लिए वरदान साबित हो रहा है। लगातार अपने कामों की वजह से ये डीएम छात्रों में लोकप्रिय हो रहे हैं। इस बीच उन्होंने एक और शानदार काम किया है। पहाड़ के बच्चों का भविष्य संवारने के लिए मंगेश घिल्डियाल ने एक ऐतिहासिक काम किया है। राजकीय इंटर कॉलेज अगस्त्यमुनि में विज्ञान वर्ग के छात्र छात्राओं के लिए इंजीनियरिंग और मेडिकल के लिए निःशुल्क कोचिंग क्लासेस शुरू की गई हैं। इसका फायदा अभी अलग अलग स्कूलों के 75 छात्रों को मिल रहा है। मंगेश घिल्डियाल का इरादा है कि अगर ये प्रयोग सफल रहता है तो आगे भी जिले के कई स्कूलों में ऐसी व्यवस्था शुरू कर दी जाएगी। इस प्रयोग को न सिर्फ छात्रों ने सराहा है, बल्कि अभिभावकों ने भी इसका खुले दिल से स्वागत किया है।
खास बात ये है कि इस तरह से पहाड़ के छात्रों का भविष्य सुधरेगा। देखा जाता है कि इंजीनियरिंग और मेडिकल की कोचिंग के लिए छात्र शहरों की तरफ रुख करते हैं। मंगेश घिल्डियाल का इरादा है कि पहाड़ के बच्चे पहाड़ में रहकर ही शानदार कोचिंग हासिल कर सकें। मंगेश घिल्डियाल ने हमेशा से शिक्षा की बेहतरी को अपनी प्राथमिकता में रखा। उन्होंने छात्र छात्राओं को प्राथमिक स्तर से ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने का काम शुरू किया है। प्राथमिक स्तर पर छात्रों को सैनिक स्कूल और जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए तैयार किया जा रहा है। वहीं सीनियर लेवल पर अलग अलग प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही खास बात ये है कि स्नातक स्तर के छात्रों को आईएएस और पीसीएस की तैयारी के लिए माहौल बनाया जा रहा है। ताकि बच्चे अपना भविष्य संवारें।
छात्रों को निःशुल्क कोचिंग देने के लिए मंगेश घिल्डियाल का साथ राइका अगस्त्यमुनि के प्रधानाचार्य जेपी चमोला ने भी दिया है। इसे देखकर धीरे धीरे आस पास के विद्यालयों के शिक्षकों ने भी इस काम में अपना योगदान देना शुरू कर दिया है। शाम को चार बजे से पांच बजे तक निःशुल्क कोचिंग क्लासेस शुरू की गई। धीरे धीरे छात्रों की संख्या बढ़ने लगी और इस वजह से इसे दो कक्षाओं में चलाया जाने लगा। एक हफ्ते के पहले दो दिनों में भौतिक विज्ञान, फिर दो दिन रसायन विज्ञान और आखिरी दो दिनों में गणित और जीवविज्ञान की कोचिंग दी जाती है। खास बात ये है कि छात्रों को एनसीईआरटी के सिलेबस के आधार पर पढ़ाया जा रहा है। पहले प्लान ये था कि हर स्कूल के टॉप पांच छात्र छात्राओं को कोचिंग दी जाएगी। लेकिन छात्रों की बढ़ती उत्सुकता को देखते हुए इसे सभी छात्रों के लिए लागू कर दिया गया है।