Video: पहाड़ी दादाजी का चेला बना अमेरिकी लड़का, अब आपसे बेहतर गढ़वाली गीत गाता है
Oct 25 2017 7:59PM, Writer:सोनिया
उत्तराखंड में कुछ बातें ऐसी हो जाती हैं, जिन्हें हम ताउम्र नहीं भुला सकते। विदेश से यहां घूमने आए लोग कई यादें अपने साथ लेकर वापस चले जाते हैं। आज हम आपको अमेरिका के एक शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कभी किसी वक्त उत्तराखंड घूमने आए थे। इस शख्स का नाम माइकल है, जो उत्तराखंड के लालुरी गांव घूमने आए थे। इस गांव की तारीफ करते हुए माइकल कहते हैं कि इस गांव के लोग बेहद ही शांत और अच्छे स्वभाव वाले हैं। माइकल कहते हैं कि उन्होंने इस गांव में अपनी जिंदगी के बेहतरीन पल बिताएं हैं। इसके साथ ही वो कहते हैं कि यहां का वातावरण बेहद शानदार है और यहां का मौसम दिल जीतने वाला है। इसके बाद माइकल अपना असल टैलेंट दिखाते हैं। वो गढ़वाली गीत शायद आपको इतनी अच्छी तरह से याद नहीं होगा, जितनी अच्छी तरह से माइकल को याद है।
दरअसल आज हम ये वीडियो आपके सामने इसलिए लेकर आए हैं क्योंकि ये सच है कि उत्तराखंड से बाहर रहने वाले कुछ उत्तराखंडी खुद को उत्तराखंडी कहने से शर्माते हैं। देखिए इस शख्स को जो गढ़वाल में आया और यहीं रच बस गया। इसके बाद माइकल ने नरेंद्र सिंह नेगी जी द्वारा गाया हुआ आंदी जांदी सांस छे तू गाया है। हो सकता है कि इस गीत की धुन उस गीत की धुन से ना मिलती हो, जिसे नरेंद्र सिंह नेगी जी द्वारा गाया गया है, हो सकता है कि नेगी जी से थोड़ा कम शानदार अंदाज में माइकल ने ये गीत गाया हो, लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि माइकल ने इस गीत को सही ढंग से याद किया है और शायद कुछ उत्तराखंडियों से बेहतर गाने की कोशिश भी की। आप भी माइकल के इस गीत को एक बार के लिए सुनेंगे तो आपको गर्व होगा पहाड़ों की संस्कृति पर, जो आज भी इतनी आकर्षक है कि विदेशी खिंचे चले आते हैं।
माइकल ने इस गीत को बेहतरीन अंदाज में गाया है। खास बात ये है कि वो पहाड़ के एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ इस गीत को गार रहे हैं। इसके अलावा भी माइकल ने इस वीडियो में कई गढ़वाली गीत गाए हैं। माइकल के इस गीत को सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया है। इस गीत को सुनकर हर कोई खुश हुए बिना नहीं रह पा रहा है। अब तक कई लोग इस वीडियो को देख चुके हैं। खासकर गढ़वाली लोगों के लिए ये किसी बेहतरीन तोहफे से कम नहीं है। विदेश से आया कोई शख्स गढ़वाल की संस्कृति में इतना रच बस गया है कि, यहीं का होकर रह गया। फिलहाल माइकल की इस कोशिश को राज्य समीक्षा की तरह से शुभकामनाएं। इसी तरह उत्तराखंड की यादों को अपने दिल में बसाए रखें।