सरहदों पर तैनात वीर पहाड़ी जवान, इस तरह किया देवभूमि को याद
Oct 28 2017 4:56PM, Writer:शमिता
एक मां का बेटा, एक बेटी का पिता, इंतजार करती पत्नी का पति और ना जाने किन यादों के बीच ये जवान जीते हैं। itbp के जवानों के साहस और शौर्य को हर कोई सलाम करता है। हर कोई इन जवानों को सलाम करता है। क्या आप जानते हैं कि अपनी मातृभूमि से दूर रहकर ये जवान किस तरह से अपने पहाड़ों को याद करते हैं। आज हम आपके लिए एक वीडियो लाए हैं। इस वीडियो के जरिए आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये वीर पहाड़ी सपूत कैसे अपने गढ़वाल की यादों में खोए रहते हैं। ये वीडियो देश के उन जवानों का है जो आपकी और हमारी रक्षा के लिए सरहदों पर अपने प्राणों की आहुति देने से भी नहीं घबराते। इस वीडियो में दिख रहा है कि हमारे ये वीर जवान पहाड़ के मशहूर गीत बोल चिट्ठी किले नी भेजी को गा रहे हैं। कभी नरेंद्र सिंह नेगी जी ने इस गीत को अपनी आवाज दी थी।
उसके बाद से इस गीत को कई अंदाजों में गाया गया था। लेकिन ये अंदाज सबसे अलग है। क्योंकि जिस तरह से इन जवानों ने इस गीत को अपनी आवाज दी है, उसमें देशभक्ति की खनक के साथ साथ मिट्टी की खुशबू है। किसी गीत को महसूस करने का इससे बेहतर अंदाज क्या हो सकता है ? जाहिर है कि अगर आप देवभूमि से हैं, तो आपको हमारे फौजियों का ये अंदाज बेहद पसंद आएगा। हाथ ना ना कोई गिटार, ना कोई तबला और ना ही कोई म्यूबजिक इंस्ट्रूमेंट। इसके बाद भी इस गीत को गाने का अंदाज एकदम अलग है। फौजी भाइयों का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और इस वजह से हमने सोचा कि आपके सामने भी इस वीडियो को रखें। गढ़वाल राइफल के जवानों के लिए कहा जाता है कि वो हर काम बेहद तल्लीनता और संजीदगी से करते हैं। शौर्य और साहस के कई किस्से इन जवानों ने गढ़े हैं।
कोई पत्थरदिल ही होगा जो शायद इस वीडियो को पसंद ना करे। त्वेकू तें जोड्यान हाथ, सुण सुण जा मेरी बात, बोल चिट्ठी किले नी भेजी। अपनी जीवन संगिनी यादों में खोए इन जावानों के दिल में भी प्यार कूट कूटकर भरा है। आखिर वो भी इंसान ही हैं। लेकिन सबसे खास बात ये है कि उन्हें देश की रक्षा की जिम्मेदारी मिली है और इसे वो बखूबी निभा रहे हैं। अब आप भी ये खूबसूरत वीडियो देखिए। पसंद आए तो शेयर जरूर करें।