उत्तराखंड की हेंवल नदी की कहानी मन की बात में गूंजी, पीएम मोदी ने की ग्रामीणों के प्रयासों की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 139वें संस्करण में टिहरी गढ़वाल की हेंवल नदी के पुनर्जीवन के प्रयासों की सराहना की। बारिश का पानी रोकने, भूजल संवर्धन और पौधरोपण से नदी के साथ दर्जनों प्राकृतिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने में मदद मिली।
Oct 25 2026 5:02PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
पहाड़ों में घटते जलस्रोतों और गर्मियों में गहराते पेयजल संकट के बीच उत्तराखंड की हेंवल नदी का पुनर्जीवन जल संरक्षण की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 139वें संस्करण में टिहरी गढ़वाल के चंबा क्षेत्र में हेंवल नदी को नया जीवन देने के लिए स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन की ओर से किए गए प्रयासों की सराहना की। बताया गया कि हेंवल नदी से चंबा शहर और आसपास के करीब 80 गांवों को पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। ऐसे में नदी का पुनर्जीवन स्थानीय आबादी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
PM Modi Praises Uttarakhand’s Henval River Revival
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में प्रकृति के प्रति सम्मान की परंपरा रही है। पूर्वजों ने आसपास स्वच्छता बनाए रखने और जलस्रोतों की देखभाल करने की जिम्मेदारी सिखाई है। उन्होंने कहा कि देश में अनेक लोग इस भावना को अपने जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। पीएम मोदी ने इसी भावना का उदाहरण देते हुए टिहरी गढ़वाल के चंबा क्षेत्र की हेंवल नदी का उल्लेख किया।उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले नदी में पानी कम होने लगा था और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत भी सूख रहे थे। इस स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर नदी को बचाने का अभियान शुरू किया। आगे पढ़िए..
बारिश का पानी रोकने और पौधरोपण पर दिया गया जोर
हेंवल नदी के पुनर्जीवन के लिए बारिश के पानी को रोकने, पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने और बड़े पैमाने पर पौधरोपण जैसे प्रयास किए गए। इन गतिविधियों का उद्देश्य वर्षा जल का संरक्षण करना और क्षेत्र के प्राकृतिक जलचक्र को मजबूत बनाना था। प्रधानमंत्री के अनुसार, सामूहिक प्रयासों से हेंवल नदी को नया जीवन मिला है। इसके साथ ही आसपास के दर्जनों प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन में भी मदद मिली है।
80 गांवों के लिए क्यों अहम है हेंवल नदी?
पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक जलस्रोतों का सूखना लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। गर्मियों में पानी की उपलब्धता कम होने से ग्रामीणों और स्थानीय निकायों के सामने पेयजल की व्यवस्था करना चुनौती बन जाता है। ऐसे में हेंवल नदी के संरक्षण का प्रयास बताता है कि स्थानीय समुदाय, प्रशासन और संबंधित विभाग मिलकर जलसंकट से निपटने की दिशा में काम कर सकते हैं। नदी और प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए भी महत्वपूर्ण है। हेंवल नदी की कहानी जल संरक्षण के साथ सामुदायिक भागीदारी की अहमियत को भी सामने लाती है। यह पहल पहाड़ों में घटते जलस्रोतों को बचाने और भविष्य के लिए पानी सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।