देवभूमि में यहां भगवान शिव के मुख की पूजा होती है, बाकी शरीर नेपाल में पूजा जाता है
Oct 31 2017 8:05AM, Writer:आदिशा
आपने भारत के कई ऐसे मंदिरों के दर्शन किये होंगे, जो भगवान शिव को समर्पित हैं। इन मंदिरों में भगवान शंकर के लिंग की पूजा की जाती है। लेकिन उत्तराखंड में दुनिया का इकलौता मंदिर ऐसा है, जहां महादेव के मुख की पूजा होती है। इस मंदिर से कुछ रोचक तथ्य जुड़े हैं, जो इसे सबसे अलग और रोचक बनाते हैं। यहाँ पूजे जाने वाले शिव जी के मुख को 'नीलकंठ महादेव' भी कहा जाता है। उत्तराखंड के चमोली जिले में मौजूद है रुद्रनाथ का दिव्य मंदिर। रुद्रनाथ मंदिर भगवान शिव जी को समर्पित धार्मिक स्थल है, जो पंचकेदारों में से एक केदार भी कहा जाता है। ये मंदिर समुद्रतल से 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। रुद्रनाथ मंदिर की भव्य प्राकृतिक छटा देखकर आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। इस मंदिर की सबसे दिलचस्प बात ये है कि, इस मंदिर में भगवान शिव जी के एकानन, यानि कि मुख की पूजा होती है। बाकि बचे शरीर की पूजा नेपाल की राजधानी काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में होती है।
रुद्रनाथ मंदिर की यात्रा गोपेश्वर से शुरू होती है। गोपेश्वर को ऐतिहासिक मंदिर गोपीनाथ मंदिर के लिए भी जाना जाता है। रुद्रनाथ की यात्रा के दौरान भक्तगण और यात्री इस गोपीनाथ मंदिर और लौह त्रिशूल के दर्शन करना नहीं भूलते। गोपेश्वर से फिर सगर गाँव तक की यात्रा की जाती है, जो रुद्रनाथ मंदिर की यात्रा का बस द्वारा अंतिम पड़ाव है। इसके बाद शुरू होती है इस मंदिर तक के लिए अकल्पनीय चढ़ाई। सगर से लगभग 4 किलोमीटर की चढ़ाई के करने के बाद सुन्दर बुग्यालों की यात्रा शुरू होती है। ये यात्रा पुंग बुग्याल से प्रारम्भ होती है। बुग्यालों और चढ़ाइयों को पार करके यात्री पित्रधार नामक स्थान पर पहुंचते हैं। यहाँ आपको शिव, पार्वती और नारायण के मंदिर मिलेंगे। यहां पर यात्री अपने पितरों के नाम के पत्थर रखते हैं। रुद्रनाथ की चढ़ाई पित्रधार में खत्म हो जाती है और यहां से हल्की उतराई शुरू हो जाती है।
रास्ते में तरह-तरह के फूलों की खुशबू यात्री को मदहोश करती रहती है। ये खुशबू आपको फूलों की घाटी सा आभास देती है। पित्रधार से होते हुए 11 किलोमीटर बाद आप अपने गन्तव्य रुद्रनाथ मंदिर में पहुंचते हैं। यहां विशाल प्राकृतिक गुफा में बने मंदिर में शिव की दुर्लभ पाषाण मूर्ति है, जहाँ शिवजी गर्दन टेढ़े किये हुए विराजमान हैं। माना जाता है कि, शिवजी की ये दुर्लभ मूर्ति स्वयंभू है। यानी ये मूर्ति खुद ही प्रकट हुई है। अब तक इसकी गहराई का पता नहीं लग पाया है। मंदिर के पास वैतरणी कुंड में शक्ति के रूप में पूजी जाने वाली शेषशायी विष्णु जी की मूर्ति भी है। मंदिर के एक ओर पांच पांडव, कुंती, द्रौपदी के साथ ही छोटे-छोटे मंदिर मौजूद हैं। मंदिर में प्रवेश करने से पहले नारद कुंड है, जिसमें यात्री स्नान करके अपनी थकान मिटाते हैं। इसके बाद मंदिर के दर्शन किए जाते हैं। रुद्रनाथ का वातावरण इतना अलौकिक है कि, यहां के सौन्दर्य को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है।