उत्तराखंड: हरक के सामने फिर खुला जैनी का जिन्न, मुश्किलें बढ़ी.. 23 साल बाद सामने आएगा सच
उत्तराखंड के 23 साल पुराने जैनी प्रकरण में खुद को इंदिरा देवी बताने वाली महिला का वीडियो वायरल हुआ है। महिला ने एक दिन का वक्त मांगते हुए सबूतों के साथ 2003 की घटना का सच सामने लाने और मामले को दोबारा खुलवाने की बात कही है।
Nov 4 2026 7:31PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड का 23 साल पुराना चर्चित जैनी (जेनी) प्रकरण एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में खुद को जैनी उर्फ इंदिरा देवी बताने वाली महिला ने कहा है कि उनके नाम को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और उनके चरित्र पर सवाल उठाए जा रहे हैं। महिला ने दावा किया कि वह एक दिन का समय चाहती हैं और इसके बाद सबूतों के साथ वर्ष 2003 में उनके साथ हुई घटना की सच्चाई सामने रखेंगी।
Jaini Case: Woman Promises Big Reveal After 23 Years
वीडियो में महिला ने अपना चेहरा छिपाया हुआ है। उन्होंने कहा कि उस समय उनकी उम्र करीब 16-17 साल थी और उनके साथ क्या हुआ, इसकी जानकारी उन्हें ही है। उन्होंने मामले को दोबारा खुलवाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है। हालांकि, वीडियो में किए गए दावों और उनकी पहचान की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।
जैनी के वीडियो से फिर चर्चा में आया पुराना मामला
वायरल वीडियो में महिला ने कहा कि इतने वर्षों बाद उनके नाम को लेकर बयानबाजी की जा रही है, जबकि किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि उनके साथ वास्तव में क्या हुआ था। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही सबूतों के साथ सामने आएंगी और पूरे मामले पर अपनी बात रखेंगी।
अंकिता भंडारी मामले के बीच शुरू हुई सियासी बयानबाजी
जैनी प्रकरण का ताजा राजनीतिक संदर्भ अंकिता भंडारी मामले को लेकर चल रही बयानबाजी से जुड़ा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पुराने तंदूर कांड और जैनी प्रकरण का उल्लेख किया था। इसके जवाब में कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा था कि उन्होंने उस समय खुद सीबीआई जांच की मांग की थी और मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उनका दावा है कि सीबीआई जांच और डीएनए परीक्षण में वह निर्दोष साबित हुए थे। उन्होंने जैनी को कभी नहीं देखने की बात भी कही थी।
महेंद्र भट्ट के सवाल के बाद बढ़ा विवाद
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी जैनी प्रकरण को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि उस समय जैनी ने बच्चे को जन्म दिया था, ऐसे में बच्चे का पिता कौन है, यह तथ्य सार्वजनिक होना चाहिए। भट्ट ने यह भी कहा था कि मामले से जुड़े तथ्य सामने आने चाहिए।
क्या है 2003 का जैनी प्रकरण?
यह मामला वर्ष 2003 का है, जब उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी और हरक सिंह रावत राजस्व मंत्री थे। असम मूल की इंदिरा देवी उर्फ जैनी ने तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाए थे। मामला राजनीतिक रूप से तूल पकड़ने के बाद हरक सिंह रावत ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सीबीआई ने मामले में डीएनए परीक्षण कराया था। जांच में बच्चे के डीएनए का मिलान हरक सिंह रावत के नमूने से नहीं हुआ था। इसके बाद हरक सिंह रावत ने खुद को निर्दोष बताया था।
अब वीडियो के बाद उठ रहे नए सवाल
करीब 23 साल पुराने इस मामले में महिला के नए वीडियो ने एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला ने सबूतों के साथ सामने आने और मामले को दोबारा खुलवाने की बात कही है। अब देखना होगा कि वह अपने दावे के समर्थन में कौन-से दस्तावेज या सबूत सार्वजनिक करती हैं और इस पर संबंधित पक्षों की आगे क्या प्रतिक्रिया आती है।