image: Gold and silver mine in uttarakhand

देवभूमि के इस गांव में है सोने-चांदी का वो भंडार, कि मलामाल हो जाएगा हिंदुस्तान

Nov 2 2017 11:25AM, Writer:अमीषा

तत्वों और खनिज संपदा से भरे उत्तराखंड में ऐसे ऐसे राज दबे हैं कि हर कोई हैरान रह जाता है। क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड के अस्कोट में सोने, चांदी, तांबा, लेड, सीसा और ऐसे इतने तत्व हैं कि हिंदुस्तान मालामाल हो सकता है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर यहां काम शुरू होगा कैसे ? उत्तराखंड के अस्कोट की धरती में इतना खजाना छिपा है, जिसे लेकर पूरी दुनिया में हलचल मची है। ये खजाना अस्कोट की पहाड़ी के नीचे बताया जाता है। वैज्ञानिंक अनुमान है कि यहां इतना खजाना दबा है जो भारत को मालामाल कर सकता है। यहां आपको हर तरह की कीमती धातु मिल सकती है। ये धातुएं ऐसी हैं, जिनके लिए पूरी दुनिया पागल रहती है। अस्कोट के बड़ी गांव क्षेत्र में एक सर्वे हुआ था। इस सर्वे की बातें जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

इस सर्वे के मुताबिक यहां सोना, चांदी, तांबा, शीशा, जस्ता, लेड जैसी एक लाख पैंसठ हजार मैट्रिक टन धातु का खजाना है। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इस खनिज संपदा से उत्तराखंड की माली हालत में किस तरह से सुधार हो सकता है। इस दिशा में सही कोशिशें नहीं की जा रही हैं। बताया जाता है कि यहां पर 30 सालों तक मिनरल एक्प्लोरेशन कारपोरेशन नाम की कंपनी ने खनन किया था। उस दौरान यहां से कई धातुएं निकाली गई थी। बताया तो ये भी जाता है कि यहां डीजीएम ने भीर सर्वे किया था और धातु निकालने का कार्य किया। इस जगह को स्थानी निवासी तामखान के नाम से पुकारते हैं। डीजीएम के एक दो कर्मचारी अभी भी यहां पर नियुक्त हैं। दरअसल MEC ने अस्कोट कस्तूरा मृग विहार होने की वजह से खनिज कार्यों को बंद करवाने का ऐलान किया था।

भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय के सर्वे के मुताबिक 2003 में कनाडा की प्रसिद्ध आदि गोल्ड कंपनी का ध्यान इस तरफ गया था। कंपनी ने सरकार से अनुमति ली और यहां पर फिर से सर्वे का काम शुरू किया। सर्वे की रिपोर्ट सामने आने के बाद कंपनी ने यहां पर व्यापक रूप से काम करने का मन बनाया। अस्कोट में कार्यालय खोला गया और सर्वे के लिए बाहर से अत्याधुनिक मशीनें आई। इसके साथ ही कंपनी ने यहां 200 करोड़ रुपये निवेश का भी मन बनाया था। साल 2007 में कंपनी ने सरकार से खुले खनन के लिए 30 साल की लीज की अनुमति मांगी। जो अभी तक नहीं मिल सकी है। इस वजह से कंपनी यहां से अपना सामान समेट चुकी है।


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