image: The legend of Major somnath sharma

पहाड़ के वीर सपूत शहीद मेजर सोमनाथ, जो 700 पाकिस्तानियों पर अकेले भारी पड़ गए थे

Nov 3 2017 11:01AM, Writer:कपिल

देश के प्रथम परमवीर चक्र विजेता (मरणोपरांत) मेजर सोमनाथ शर्मा वो नाम है, जिसने युद्ध के मैदान में दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था | आज कश्मीर का जो हिस्सा भारत के पास है, उसका श्रेय जिन वीर सिपाहियों को है, उनमें से मेजर सोमनाथ शर्मा का नाम सबसे आगे रखा जाता है। 31 जनवरी, 1922 को हिमाचल के डाढ में मेजर जनरल अमरनाथ शर्मा के घर में सोमनाथ का जन्म हुआ। सैनिक परिवार में जन्म लेने की वजह से सोमनाथ शर्मा वीरता और बलिदान की कहानियां सुनकर बड़े हुए थे। देशप्रेम की भावना उनके खून में समायी थी। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा नैनीताल में हुई थी। इसके बाद इन्होंने इंडियन मिलट्री कॉलेज, देहरादून से सैन्य प्रशिक्षण लिया। 22 फरवरी 1942 को इन्हें कुमाऊँ रेजिमेण्ट की चौथी बटालियन में सेकण्ड लेफ्टिनेण्ट के पद पर नियुक्ति मिली।

इसी साल उन्हें बर्मा के मोर्चे पर भेजा गया। वहाँ इन्होंने बड़े साहस और कुशलता से अपनी टुकड़ी का नेतृत्व किया। 15 अगस्त, 1947 को भारत के स्वतन्त्र होते ही देश का विभाजन हो गया। पाकिस्तानी सैनिक कबाइलियों के वेश में कश्मीर हड़पने के लिए टूट पड़े। इसके साथ ही भारत सरकार के आदेश पर सेना सक्रिय हो गयी। मेजर सोमनाथ शर्मा की कम्पनी को श्रीनगर के पास बड़गाम की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गयी। सिर्फ 100 सैनिकों की अपनी टुकड़ी के साथ वो डट गये। दूसरी ओर सात सौ से भी ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक जमा थे। साहस की धनी मेजर सोमनाथ शर्मा ने हिम्मत नहीं हारी। उनका आत्मविश्वास अटूट था। उन्होंने अपने ब्रिगेड मुख्यालय पर समाचार भेजा कि ‘’जब तक मेरे शरीर में एक भी बूँद खून और मेरे पास एक भी जवान शेष है, तब तक मैं लड़ता रहूँगा।’’

दोनों ओर से लगातार गोलाबारी हो रही थी। 3 नवम्बर, 1947 को शत्रुओं का सामना करते हुए एक बम मेजर सोमनाथ के समीप आ गिरा। उनका सारा शरीर छलनी हो गया। खून के फव्वारे छूटने लगे। इस पर भी मेजर ने अपने सैनिकों को सन्देश दिया ‘’इस समय मेरी चिन्ता मत करो। हवाई अड्डे की रक्षा करो। दुश्मनों के कदम आगे नहीं बढ़ने चाहिए।’’ ये सन्देश देतेे हुए मेजर सोमनाथ शर्मा ने प्राण त्याग दिये। उनके बलिदान से सैनिकों का खून खौल गया। उन्होंने तेजी से हमला बोलकर शत्रुओं को मार भगाया। अगर वो हवाई अड्डा हाथ से चला जाता, तो पूरा कश्मीर आज पाकिस्तान के कब्जे में होता। मेजर सोमनाथ शर्मा को मरणोपरान्त ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित किया गया। आज मेजर का शहादत दिवस है। शत शत नमन इस वीर सपूत को।


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