उत्तराखण्ड में सड़क चौड़ीकरण के लिए काट डाले 14000 पेड़... दिल्ली दूर नहीं है जनाब !
Nov 16 2017 6:20PM, Writer:शैल
वन विभाग का कहना है कि एनएच 87 की भेंट चढ़ रहे 14488 पेड़ों पर छपाई कर वन-निगम को काटने के लिए सौंप दिए गए हैं और तकरीबन 80 प्रतिशत हरेभरे पेड़ों को काटने का काम पूरा भी किया जा चुका है। इन पेड़ों की क्षतिपूर्ति के लिए तराई केंद्रीय वन प्रभाग में जमीन तलाश ली गई है लेकिन पौधे लगाने के लिए पैसा अभी नहीं आया है... उनके मुताबिक जैसे ही वन विभाग के पास पैसा आएगा वैसे ही पेड़ों को लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। लगातार ग्लोबल वर्मिंग और जलवायु परिवर्तन के चलते सभी देश एकजुट होकर पर्यावरण की गिरती स्थिति को देखकर पर्यावरण को बचाने के लिए पूरे विश्व में कई बैठकें हो रही हैं। देश की राजधानी दिल्ली में भी इस समय जो हालात हैं उनसे यह अंदाजा लगाना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है कि आने वाले दिनों में पर्यावरण पर संकट और ज्यादा गहराने वाला है। दिक्कत इस बात है कि इन भीषण हालातों से अधिकारी अभी भी सबक नहीं ले रहे। उत्तराखण्ड के हल्द्वानी तराई केंद्रीय वन प्रभाग में एनएच 87 के चौड़ीकरण का कार्य जोरों पर है।
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दरअसल रुद्रपुर से काठगोदाम तक हजारों पेड़ों को काटने की परमिशन वन विभाग ने बिना पेड़ लगाए ही वन निगम को दे दी, जिस पर वन निगम ने सड़क के दोनों किनारों में काम प्रारंभ करते हुए 80 फीसदी हरे पेड़ों को काट भी दिया। रामपुर से काठगोदाम तक राष्ट्रीय राजमार्ग 87 को फोर लाइन में तब्दील किया जा रहा है जिसकी लंबाई कम से कम 93 किलोमीटर है। रुद्रपुर से काठगोदाम तक ये दूरी लगभग 40 किलोमीटर है जिसमें से अधिकांश क्षेत्र वन विभाग का है, इसमें एनएच के चौड़ीकरण को लेकर छोटे बड़े लगभग 15 हजार से अधिक हरे पेड़ों को काटा जाएगा। वनस्पति विषेशज्ञों का कहना है कि जिस रफ्तार से उत्तराखंड में सड़कों का निर्माण हो रहा है और उन सड़कों के किनारे लगे हरे पेड़ों को काटा जा रहा है उससे पर्यावरण असुंतलन होने की संभावना और अधिक बढ़ गई है। जानकारों के मुताबिक ऐसे भी कई पेड़ हैं जो छोटे-छोटे कस्बो ओर शहरों की पहचान बन गए थे लेकिन प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद भी पेड़ों की जगह नए पेड़ों का रोपण ना होना पर्यावरण के लिए चिंता का विषय है।
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डीएफओ तराई केंद्रीय वन प्रभाग का कहना है कि, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि जिन 14 हजार से अधिक पेडों की बलि सड़क चौड़ीकरण के कारण ली गयी है उनकी जगह नये पौधों का वृक्षारोपण किया जाएगा अथवा नहीं... वर्तमान तक तो जो स्थिति है उसमें वृक्षारोपण में काफी वक्त लगने की संभावना है।
बढ़ते प्रदूषण की वजह से जहां दिन प्रतिदिन देश की राजधानी दिल्ली में लोगों का बुरा हाल होता जा रहा है वहीँ इस प्रकार से पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करना आखिर पर्यावरण के प्रति कैसी जिम्मेदारी प्रदर्शित करता है ? एनएच 87 के चौड़ीकरण के लिए जिस तरह बिना क्षतिपूर्ति के हरे पेड़ों को काटने का काम किया जा रहा है उससे यह निश्चित है कि आने वाले दिनों में उत्तराखण्ड में प्रदूषण का वही हाल होने वाला है जो अभी देश की राजधानी दिल्ली का है। स्मोग के लिए तैयार रहें... दिल्ली ज्यादा दूर नहीं है जनाब।