देवभूमि को मेगा स्टार रजनीकांत का प्रणाम, यहीं से मिली इस कलाकार को नई जिंदगी
Nov 17 2017 10:02AM, Writer:देव
रजनीकांत के बारे में आप जानते होंगे। अपनी अदाकारी से फिल्म जगत में तहलका मचा देने वाले इस कलाकार के बारे में कुछ बातें ऐसी हैं, जिनके बारे में हर उत्तराखंडी का जानना जरूरी है। क्या आप जानते हैं कि रजनीकांत आज जिस मुकाम पर खड़े हैं, वो सब कुछ उत्तराखंड की वजह से ही है। इस महानायक की श्रद्धा का केंद्र उत्तराखंड है। खुद रजनीकांत कहते हैं कि उत्तराखंड की कृपा से उनके जीवन में काफी तरक्की आई है। दरअसल रजनीकांत आध्यात्म और योग को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा मानते हैं। उनकी श्रद्धा का केंद्र द्वाराहाट का योगदा आश्रम है। अल्मोड़ा में स्थित इस आश्रम में स्वामी परमहंस ने भी योग की दीक्षा ली थी। रजनीकांत ने स्वामी परमहंस की बायोग्राफी पढ़ी थी। इस बायोग्राफी से रजनीकांत काफी प्रभावित हुए थे। इसके बाद उन्होंने योग को ही अपनी जिंदगी का आधार बना लिया था।
रजनीकांत खुद दो बार योगदा आश्रम आ चुके हैं। अच्छी बात तो ये भी है कि रजनीकांत इस जगह पर 20 लाख की लागत से एक विशाल भवन बनवा रहे हैं। इस भवन में योगा सेशन चलाया जाएगा। योगदा आश्रम द्वाराहाट से दो किलोमीटर दूर बसा है। यहां की शांति और सुंदरता हर किसी को अपनी तरफ खींचती है। इस केंद्र की नींव स्वामी परमहंस ने रखी थी। स्वामी परमहंस के अनुयाइयों की लिस्ट भी काफी लंबी है। इसी लिस्ट में रजनीकांत का नाम भी शामिल है। इसे योग की ही शक्ति कहेंगे कि इससे प्रभावित होकर रजनीकांत ने साल 2000 में बाबा नाम की फिल्म भी बनाई थी। कुछ लोग बताते हैं कि शुरू में ये फिल्म फ्लॉप होने लगी थी। इसके बाद निराश होकर रजनीकांत योगदा आश्रम आए थे। यहां से लौटकर रजनीकांत ने दोबारा इस फिल्म के लिए मेहनत की थी। इसके बाद ये फिल्म हिट हो गई।
श्रीहरि बताते हैं कि इसके बाद 2005 में रजनीकांत यहां आए थे और उन्होंने पांडवखोली में ध्यान भी लगाया।यहां अनुयायियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस वजह से रजनीकांत ने यहां एक भवन निर्माण करवाया था। इस भवन में 6 कक्ष बनवाए जा रहे हैं। हालांकि बीते 10 अक्टूबर को रजनीकांत को यहां पहुचना था। लेकिन व्यस्त होने की वजह से वो यहां नहीं आ पाए थे। अब बताया जा रहा है कि रजनीकांत अगले साल मार्च में योगदा आश्रम में आएंगे। रजनीकांत ही नहीं,यहां अनुयायियों की लिस्ट में अभिनेत्री जूही चावला भी हैं। 2016 में केंद्रीय मंत्री उमा भारती भी यहां आई थीं। उन्होंने यहां पांडवखोली स्थित गुफा में ध्यान लगाया। इस आश्रम में अमेरिका, यूरोप, जापान,कनाडा, इंग्लैंड, मलेशिया, चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और जॉर्डन जैसे मुल्कों से भी लोग आते हैं।