उत्तराखंड के गांव का छोरा बना इंटरनेशनल खिलाड़ी, अमेरिका से आया बुलावा
Nov 17 2017 11:14AM, Writer:अर्पिता
उत्तराखंड के बॉक्सर कविंद्र बिष्ट के बारे में तो आप जानते ही होंगे। पहाड़ के इस लाल ने कई बार देवभूमि को गर्व के पल दिए हैं। एक बार फिर से कविद्र बिष्ट के लिए बड़ी खबर है। कविंद्र को इंटरनेशनल कोचिंग कैंप के लिए टीम इंडिया में जगह दी गई है। इस कैंप का आयोजन अमेरिका में होगा। ये कैंप 1 दिसंबर से 18 दिसंबर तक अमेरिका में लगेगा। खास बात ये है कि इस कैंप के लिए भारत की तरफ से 9 खिलाड़ियों का चयन किया गया है। कविंद्र आजकल सीनियर बॉक्सिंग टीम के साथ पटियाला में ट्रेनिंग ले रहे हैं। साई कोच भास्कर भट्ट के मुताबिक बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इस टूर का प्रस्ताव बना दिया है। इसे केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। कविंद्र की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। उनके दमदार मुक्कों को आगे बड़े बड़े विरोधी चित हो जाते हैं।
कविंद्र सिंह बिष्ट हाल ही में भारत के उन 152 एलीट खिलाड़ियों में शामिल हुए हैं, जिन्हें टोक्यो ओलंपिक के लिए तैयारी करनी है। भारत सरकार द्वारा कविंद्र सिंह बिष्ट को हर महीने अपने खेल को और दमदार बनाने के 50 हजार रुपये मिलेंगे। इसके साथ ही एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ के लिए भी कविंद्र को तैयारी करनी है। हाल ही में वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कविंद्र सिंह बिष्ट देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। कविंद्र पिथौरागढ़ के पंडा गांव के रहने वाले हैं। इससे पहले अप्रैल में उजबेकिस्तान में हुई एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने क्वॉर्टर फाइनल तक का सफर तय किया था। उस दौरान कविंद्र ने 52 किग्रा वेट कैटेगरी में खेला था। शुरुआती दिनों में कविंद्र के दिल में फुटबॉल का जुनून उफान मार रहा था। गांव के छोटे से मैदान में वो फुटबॉल खेला करते थे। लेकिन इस बीच उन्हें धरम चंद के रूप में एक बेहतरीन बॉक्सिंग कोच मिला।
धरम चंद ने कविंद्र को बॉक्सिंग खेलने के लिए लगातार प्रेरित किया। गुरु की प्रेरणा मिली तो कविंद्र ने फुटबॉल छोड़ा और बॉक्सिंग के ग्लब्स को अपने हाथों में थाम लिया। यहां से शुरू होता है कविंद्र के शआनदार करियर का सफर। कविंद्र ने साल 2009 में साई सेंटर काशीपुर में एडमीशन लिया। कोच एचएस संधू ने 2013 तक उन्हें बॉक्सिंग के पेचीदगियां सिखाई। इसी दौरान कविंद्र ने ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल कर लिया। इसके साथ ही इस चैंपियनशिप में उन्हें बेस्ट बॉक्सर का खिताब मिला। इसके बाद कविंद्र स्टेट चैंपियन भी रहे। कविंद्र के पिता पिता आइटीबीपी में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। फिलहाल कविंद्र भारतीय सेना में हैं। आने वाले वक्त में इस बदौलत वो अपने खेल में और ज्यादा सुधार करेंगे। टोक्यो ओलंपिक को लेकर कविंद्र से काफी उम्मीदें हैं।