हर उत्तराखंडी से अपील, 7 साल की बच्ची को बचाइए, सारिका के लिए दुआ कीजिए
Nov 17 2017 1:34PM, Writer:अमित
हर बार उत्तराखंड के लोगों ने अपनी दरियादिली का परिचय दिया है। जब जब किसी पर कोई मुश्किल आई तो उत्तराखंड के लोग बढ़चढ़कर आगे आए। लेकिन आज एक बार फिर से हर उत्तराखंडी से हमारी एक अपील है। रुद्रप्रयाग जिले की रहने वाली 7 साल की बच्ची सारिका को आपकी दुआओं की जरूरत है। 7 साल की उम्र में जब बच्चे खेलने कूदने लगते हैं, अपनी किलकारियों से घर आंगन को रोशन करते हैं, उस उम्र में सारिका का कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो गई है। पिता कलम सिंह बेहद गरीब हैं। परिवार से जितना हो सकता था, उन्होंने कर दिया। ऊखीमठ के सरुणा गांव की रहने वाली सारिका अब जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है। बेटी के लिए पिता ने कई सपने पाले थे। दिनभर मेहनत मजदूरी कर थोड़ी सी रकम भी जुटाई थी। लेकिन इलाज के दौरान वो सारी रकम खत्म हो गई।
पहले सारिका को देहरादून के महंत इंद्रेश अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां डॉक्टर्स ने कैंसर की पुष्टि की। इसके बाद सारिका को दिल्ली के एम्स में इलाज के लिए ले जाया गया। एम्स में भीड़ ज्यादा थी और सारिका को तुरंत इलाज की जरूरत थी। इस वजह से उन्हें फरीदाबाद के सर्वेदय अस्पताल ले जाया गया। पिता ने इसके बाद सारिका के इलाज के लिए कर्जा भी लिया। पिता के दिल की बातें आंसुओं का सैलाब बवकर आंखों से बहने लगती हैं। बेटी के इलाज के लिए जनप्रतिधिनियों और स्वयंसेवी संस्थाओं से गुहार लगाई गई है। हर तरफ से सारिका के लिए हाथ उठने लगे हैं। हमारी भी आपसे ये ही अपील है कि सारिका की मदद के लिए ज्यादा से ज्यादा संख्या में आगे बढ़ें। आर्थिक मदद ना भी कर पाएं तो 7 साल की इस बच्ची के लिए दिल से दुआ कीजिए। पहाड़ की एक बच्ची बच जाएगी।
घर आंगन में एक बार फिर से बच्ची की चहलकदमी शुरू हो जाएगी। इसलिए दुआ करना मत भूलिएगा। सारिका सरस्वती शिशु मंदिर में कक्षा दो में पढ़ती हैं। एक बच्ची अपने पिता के लिए कितनी प्यारी होती है, ये उस पिता से पूछिए जो अपनी बेटी के लिए दर दर की ठोकर खा रहे हैं। वो पिता बिना खाए-पीए अपनी बेटी को बचाने के लिए जद्दोजहद में जुटे हैं। ना जाने कितने सपने पाले होंगे इस परिवार ने सारिका के लिए। पढ़ाई के सपने, बड़े ऑफिसर बनाने के सपने, शादी के सपने और ना जाने कितने सपने होते हैं एक बेटी के लिए। कई लोग सारिका के परिवार की मदद कर रहे हैं भगवान उन्हें लंबी उम्र दे। आइए हम सब उत्तराखंडी मिलकर एक बच्ची को बचाते हैं। यकीन मानिए आपके दिल को भी सुकून मिलेगा। कहते हैं कि बेटी है तो कल है, इसलिए इस बेटी के लिए दुआ करना हम सभी का परम कर्तव्य है।