image: Nitendra singh rawat won gold medal in delhi half marathon

उत्तराखंड के गांव के छोरे ने रचा इतिहास, मैराथन में रिकॉर्ड के साथ जीता गोल्ड मेडल

Nov 22 2017 5:11PM, Writer:कपिल

उत्तराखंड की प्रतिभाएं आज किसी पहचान की मोहताज नहीं रह गई हैं। जहां भी मौका मिलता है, ये प्रतिभाएं अपना बेमिसाल हुनर दिखाती हैं और लगातार आगे बढ़ती हैं। इन्हीं प्रतिभाओं में से एक नाम है नितेंद्र सिंह रावत। नितेंद्र सिंह रावत को आप उत्तराखंड की शान भी कहें तो इसमें कोई गुरेज नहीं। बागेश्वर के रहने वाले नितेंद्र के बारे में कहा जाता है कि खेलों के लिए इन्होंने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था। इसका फल ये है कि उन्होंने दिल्ली हाफ मैराथन में ना सिर्फ गोल्ड मेडल पर कब्जा किया, बल्कि नेशनल रिकॉर्ड भी कायम किया है। दिल्ली में हाफ मैराथन का आयोजन हुआ तो नितेंद्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती गोल्ड मेडल जीतना था और उत्तराखंड का नाम रोशन करना था। इसके साथ ही उनका टारगेट पिछले रिकॉर्ड को ध्वस्त करना था। पिछला रिकॉर्ड राजस्थान के दीपचंद के नाम था।

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लेकिन नितेंद्र ने इस मैराथन में गोल्ड मेडल जीतने के साथ ही टाइमिंग का भी नया इतिहास रच दिया। नितेन्द्र ने मीट रिकॉर्ड के साथ साथ नेशनल रिकॉर्ड तैयार कर डाला और साबित कर दिया कि उत्तराखंड की प्रतिभाएं अब विश्व के फलक पर हुंकार भरने के लिए तैयार हैं। नितेन्द्र ने इस मैराथन को पूरा करने में एक घंटा 38 मिनट और 53 सेकेंड लिए। आपको बता दें कि नितेंद्र सिंह रावत भारतीय सेना के जवान हैं। नितेन्द्र से पहले हाफ मैराथन का नेशनल रिकॉर्ड राजस्थान के दीपचंद के नाम था। साल 2009 में दीपचंद ने एक घंटा चार मिनट में ये मैराथन पूरी की थी। आपको बता दें कि दिल्ली हाफ मैराथन को वर्लड क्लास मैराथन का दर्जा मिला है। खुद नितेंद्र के कोच सुरेंद्र सिंह भंडारी कहते हैं कि ये एक टॉप क्लास मैराथन है। इस दौरान केंद्रीय खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ भी यहां मौजूद थे।

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उन्होंने नितेंद्र को स्वर्णिम भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। नितेंद्र के बारे में कुछ और भी खास बातें हैं, जिनके बारे में आपका जानना बेहद जरूरी है। साल 2015 से उन्होंने मैराथन शुरू की थी। इसी दौरान उन्होंने रियो ओलिंपिक की फुल मैराथन में हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व किया था। ओलंपियन नितेंद्र सिंह रावत ने भारतीय पुरुषों की रेस जीती। इस रेस में दूसरे नंबर पर जी लक्ष्मणन रहे और महाराष्ट्र के अविनाश साबले तीसरे स्थान पर रहे। नितेंद्र को स्वर्णित भव्षिय के लिए राज्य समीक्षा की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं। ऐसे ही आगे बढ़ते रहिए और उत्तराखंड का नाम रोशन कीजिए। नितेंद्र के गोल्ड मेडल जीतने के बाद इतना जरूर कहा जा सकता है कि आने वाले ओलंपिक में वो देश का तिरंगा एक बार फिर से बुंलदी पर ले जा सकते हैं। शुभकामनाएं...जय भारत..जय उत्तराखंड


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