उत्तराखंड पर नजर डालने से पहले अब 100 बार सोचेगा चीन, बॉर्डर पर तैनात होगी ब्रह्मोस !
Nov 23 2017 2:17PM, Writer:मीत
कई बार कहा जाता है कि चीन के मुकाबले भारत एटमी ताकत में थोड़ा कमंजोर है। लेकिन अब ऐसा नहीं कहा जाएगा। चीन को हर मोर्चे पर मात देने के लिए ब्रह्मोस मिसाइल का हवा में सफल परीक्षण कर लिया गया है। सुखोई फाइटर जेट से ब्रह्मोस का सफल परीक्षण बताता है कि दुश्मन देशों के मुकाबले भारत की ताकत में जबरदस्त इजाफा हुआ है। खास तौर पर उ्तराखंड के लिहाज से ये बेहद ही शानदार खबर है। बार बार बाराहोती सेक्टर से चीन उत्तराखंड पर नजरें गढ़ाए रहता है। कई बार वो वहां से घुसपैठ भी कर चुका है। इसलिए प्लान ये भी है कि उत्तराखंड से सटी चीन सीमा पर भी इसे तैनात किया जा सकता है। अब जरा ये जान लीजिए कि इससे हमें क्या फायदा मिलेगा। भारतीय वायुसेना के पास अब ऐसी ताकत है कि दुश्मन देश के वॉरशिप को 400 किलोमीटर की दूरी से ही निशाना बना सकती है।
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खास बात ये है कि इस काम को बस चंद मिनटों में ही अंजाम दिया जा सकता है। इस परीक्षण के साथ ही ये भी साबित हो गया है कि इस मारक मिसाइल को जमीन, हवा और पानी कहीं से भी दुश्मन मुल्क पर छोड़ा जा सकता है। माना जा रहा है कि इस मिसाइल को देश की सीमा रेखाओं पर तैनात किया जाएगा। इनमें कश्मीर, असम, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं। आपको याद होगा कि हाल ही में चीन द्वारा धकी दी गई थी कि उत्तराखंड के रास्ते भारत में घुसपैठ कर सकता है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भारत को ये दी है। इसे पहले चीन भारत से डोकलाम में मात खा चुका है। भारत की प्लानिंग है कि बॉर्डर इलाकों को इस मापर अस्त्र से सुसज्जित किया जाए। हालांकि ब्रह्मोस मिसाइल 2006 से ही नेवी और आर्मी का हिस्सा है।
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इस बीच सुखोई- 30एमकेआई फाइटर जेट से इसका सफल परीक्षण साबित करता है कि ये अब और भी ज्यादा मारक हो गई है। इसके पीछे एक खास वजह भी है। सुखोई की रफ्तार बाकी फाइटर जेट्स से काफी तेज है। भारतीय सेना ये जांच करना चाहती थी कि सुखोई से ये मिसाइल लॉन्च हो सकती है या फिर नहीं हो सकती। दरअसल सुखोई की रफ्तार 1,500 किलोमीटर की है। सुखोई-30 और ब्रह्मोस का ये गठजोड़ दुश्मन मुल्कों को एक पल के लिए आराम करने का मौका नहीं देगा। इस मिसाइल को भारत और रूस द्वारा तैयार किया गया है। ये आवाज की गति से 2.8 गुना रफ्तार से चलती है। बताया जा रहा है कि देश के 42 सुखोई लड़ाकू विमानों को अब ब्रह्मोस से लैस किया जाएगा। इसके जरिए दुश्मन के इलाके में तहलका मच सकता है। आतंकवादी कैंपों, एटमी बंकरों और कमान सेंटरों पर ये अब सटीक निशाना लगा सकती है।