उत्तराखंड का ‘नेचर’ मैन, पर्यावरण बचाने के लिए साइकिल से नापा हिंदुस्तान
Dec 20 2017 4:44PM, Writer:आदिशा
एक प्रेरणा, एक मिसाल, 57 साल के बुजुर्ग, नाम है भूपेंद्र सिंह मेहरा। साइकिल के दो पहियों से उस बुजुर्ग ने पूरा हिंदुस्तान नाप दिया। जी हां साइकिल से, और इसके पीछे सिर्फ एक वजह कि आइए पर्यावरण को बचाएं, इस पवित्र देवभूमि को बचाएं। ये बात भी सच है कि पर्यावरण है तो हम सब हैं। आज की युवा पीढ़ी को इस बात की जानकारी देना सबसे ज्यादा जरूरी है। युवा पीढ़ी इसलिए क्यों कि बुजुर्ग तो एक दिन चले जाएंगे, लेकिन उस संदेश को हमें आगे बढ़ाना होगा । तभी हम अपनी मातृभूमि के सेवक कहे जा सकते हैं। भूपेंद्र सिंह मेहरा जो कि 16 अक्टूबर को देहरादून से चले थे। इसके बाद उन्होंने साइकिल से ही उत्तर प्रदेश के 14 जिलों का पास किया। इसके बाद मध्य प्रदेश के 4 जिलों को पार किया, महाराष्ट्र के 9 जिलों को पार कर नामपुर और पूना होते हुए 15 दिंसबर को मुंबई पहुंचे।
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उनकी मुलाकात महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फड़णवीस से हुई। उन्होंने देवेंद्र फड़णवीस को अपना पर्यावरण बचाने के संदेश दिया और वापस उत्तराखंड के लिए निकल पड़े। 57 साल के भूपेंद्र सिंह मेहरा हल्दवानी के रहने वाले हैं। गजब के जुनूनी हैं भूपेंद्र सिंह मेहरा। सिर पर टोपी और गले में गमछा पहने, ठंड की परवाह किए बिना ही साइकिल से भारत भ्रमण पर निकले। पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश लेकर उत्तराखंड से मुंबई पहुंच गए। इस कठिन यात्रा को करने में अच्छे खासे लोगों के पसीने छूट जाते हैं। लेकिन भूपेंद्र सिंह मेहरा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र चक्कर लगा चुके हैं। छड़ायल सुयाल गांव हल्द्वानी निवासी 57 साल के भूपेंद्र दिन भर में 50 से 60 किलोमीटर की दूरी नाप लेते हैं। यात्रा के दौरान जहां भी लोग दिखते हैं, उनकी साइकिल के आगे तख्ती पर लिखे संदेश को पढ़ने लगते हैं।
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साथ में भूपेंद्र भी लोगों को अपने क्षेत्र को स्वच्छ रखने और पेड़ लगाने का संदेश भी देते हैं। इस यात्रा में उनकी मदद उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद भी कर रहा है। उनका उद्देश्य है, लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना। मन में कुछ करने की तमन्ना हो, हौसले बुलंद हो, इरादे पक्के हों तो ,कोई भी काम असंभव नहीं हैं। ये भूपेंद्र जी ने कर दिखाया है। महाराष्ट्र के सीएम से मुलाकात के दौरान भूपेंद्र ने उन्हें पर्यावरण को सुरक्षित बनाने के लिए कई बातें बताई हैं। धीरे धीरे लोग उन्हें उत्तराखंड का नेचर मैन नाम से पुकार रहे हैं। भूपेंद्र की जिंदगी का एक ही मिशन है कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जाए। इसी में हम सभी का जीवन है और इसी के जरिए हम सब आने वाली पीढ़ियों को खुशहाल देख सकते हैं। जाहिर है कि भूपेंद्र सिंह जी के इस जज्बे को हर किसी का सलाम करना बनता है।