image: Labhanshu sharma creates new record in asian subcontinent

देवभूमि का बाहुबली, 20 टन वजनी ट्रक खींचा, एशिया में ऐसा आज तक नहीं हुआ !

Dec 20 2017 8:40PM, Writer:अमित

उत्तराखंड के पहलवान लाभांशु शर्मा के बारे में तो आप जानते ही होंगे। इस पहलवान ने कई बार देवभूमि को गर्व करने का मौका दिया है। अब इस पहलवान ने एक बड़ा कारनामा कर दिखाया है। लाभांशु शर्मा ऋषिकेश के रहने वाले हैं। खास बात ये है कि वो अपनी ताकत बढ़ाने के लिए कोई स्टेरॉयड या फिर मांसाहार नहीं लेते। ये एक शुद्ध और शाकाहारी पहलवान है। लाभांशु शर्मा ने जॉर्जिया में 20 टन वजनी ट्रक को खींचने का नया रिकॉर्ड तैयार किया है। इन दिनों वो यूरोप के जॉर्जिया में कुश्ती का अभ्यास कर रहे हैं। बुधवार के दिन लाभांशु ने इस रिकॉर्ड को अपने नाम कर दिखाया। जॉर्जिया की राजधानी तबिल्सी में लाभांशु ने ये कारनामा किया। उन्होंने 20 टन वजनी ट्रक को अपनी कमर से बांधकर 10 मीटर तक खींचा। लाभांशु ने इसके साथ ही बड़ा दावा किया है।

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लाभांशु ने दावा किया है कि वो ऐसा करने वाले एशिया के पहले पहलवान बने हैं। इससे पहले तमाम पहलवानों ने 10 टन वजन तक के ट्रक खींचे थे। ये आयोजन लाभांशु शर्मा ने खुद की ताकत आजमाने के लिए किया था। लाभांशु ने बताया कि इस के लिए वो बीते तीन महीने से प्रैक्टिस कर रहे थे। लाभांशु अब तक स्कूल गेम्स से लेकर नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर कुश्ती में कई मेडल जीत चुके हैं। आपको लाभांशु के बारे में कुछ दिलचस्प बातें भी बता देते हैं। इसे पहले नेपाल के काठमांडू में आयोजित हुई इंडो-नेपाल कुश्ती चैंपियनशिप में लाभांशु ने नेपाल आर्मी के पहलवान को ही चारों खाने चित कर दिया था और देश को गोल्ड मेडल दिलाया था। ऋषिकेश के चंद्रेश्वर नगर निवासी लाभांशु शर्मा साल 2015 में राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं।

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नेशनल स्कूल गेम्स में उत्तराखंड को कुश्ती का पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले लाभांशु राष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती में कई पदक जीत चुके हैं। लाभांशु का लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण जीतना है। सबसे खास बात ये है कि श्रीलंका में आयोजित एशियन इंटरनेशनल गेम्स में उन्होंने पाकिस्तान के पहलवान को करारी टक्कर देकर कुश्ती में गोल्ड मेडल हासिल किया था। राज्य समीक्षा का मानना है कि ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को हर तरह से मदद की जानी चाहिए, जिससे आने वाले भविष्य में उत्तराखंड से और भी ऐसे बड़े खिलाड़ी पनप सकें। देवभूमि भी ऐसे ऐसे ताकतवर और हुनरमंद युवाओं को पैदा कर रही है, जो देश ही नहीं बल्कि दुनिया में अपना लोहा मनवा रहे हैं। अगर हिम्मत हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता बल्कि और भी ज्यादा आसान होता है।


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