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Video: उत्तराखंड का दिलेर सेनानायक, जिसने बिन मां-बाप के एक लड़के को दी नई जिंदगी

Dec 22 2017 6:05PM, Writer:कपिल

आज हम आपको एक किस्सा बताने जा रहे हैं। एक शख्स जो आज उत्तराखंड के लिए किसी देवदूत से कम नहीं हैं। ये नाम है कर्नल अजय कोठियाल। कर्नल आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। देश सीमाओं से लेकर मुल्क के अंदर हर चुनौती को कर्नल कोठियाल ने बखूबी स्वीकार किया। इसलिए आज वो युवाओं के लिए एक मिसाल बन रहे हैं। कर्नल कोठियाल नेहरु पर्वतारोहण संस्थान यानी एनआईएम के प्रिंसिपल हैं। गुप्तकाशी का रहने वाला महेश चंद शुक्ला, जिसकी मुस्कुराहट कभी दोस्तों का दिल जीत लेती थी। मजाक करने का उसका अंदाज हर किसी को पसंद था। एक हंसमुख, लोकप्रिय, अविवाहित और कार्यरत फार्मासिस्ट महेश शुक्ला की जिंदगी में एक तूफान आ गया था। 2013 में एक दुर्घटना की वजह से महेश पूर्ण रूप से विकलांग हो गया था।

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उसने कई डॉक्टरों को दिखाया पर कहीं भी सही ढंग से इलाज नहीं मिल पाया। डॉक्टर भी इलाज की आशा छोड़ चुके थे। महेश के माता-पिता नहीं थे और देख भाल के लिए कोई करीबी भी नहीं था। वो एक अंधेरे कमरे में अक्सर अपनी ही गन्दगी में सना हुआ अकेला बिस्तर पर पड़ा रहता था। देख भाल के अभाव में वो अजीब सी बीमारी का भी शिकार हो गया। इस बीमारी ने एक स्वस्थ शरीर को हड्डियों के ढांचे में बदल दिया था। महेश हर वक्त मौत की तरफ जा रहा था। महेश के हालात की खबर कर्नल अजय कोठियाल को लगी और यूथ फाउंडेशन ने तुरंत उसका मामला हाथ में लेते हुए उसे दिल्ली भिजवाया। दिल्ली में योग्य डॉक्टरों ने एक साल से ज्यादा वक्त तक महेश का इलाज किया। महेश आज 80 फीसदी ठीक हो चका है। जो कभी सरक नहीं सकता था, आज वो चलने की कोशिश कर रहा है।

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जाहिर है ये सब कुछ कर्नल अजय कोठियाल की बदौलत हुआ है। कर्नल अजय कोठियाल 1992 में चौथी गढ़वाल राइफल में बतौर ऑफिसर शामिल हुए। देश की रक्षा करते हुए कर्नल अजय कोठियाल ने 7 आंतकियों को भी मार गिराया था। खुद भी 2 गोलियां उनके सीने में लगी थी। साहस के लिए उन्हें कीर्ती चक्र, शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा मेडल जैसे सम्मान दिए जा चुके हैं। मौजूदा वक्त में राज्य के करीब 700 से 800 युवा उनके 6 स्थानों पर चलाए जा रहे कैंपों में ट्रेनिंग ले रहे हैं। महेश के आत्मविश्वास और कर्नल कोठियाल की इस दिलेरी को सलाम है।


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