पलायन से लड़ेंगे देवभूमि के गांव, डीएम मंगेश घिल्डियाल की ‘स्मार्ट’ पहल, मिलेगा रोजगार
Dec 26 2017 6:16PM, Writer:अमित
पलायन इस वक्त उत्तराखंड के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। देखा जा रहा है कि हर तरफ ये समस्या अपने पैर पसार रही है। लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं, जो इस समस्या से निपटने के लिए सार्थक पहल कर रहे हैं। इनमें से एक रुद्रप्रयाग जिले के डीएम मंगेश घिल्डियाल भी हैं। डीएम मंगेश ने इसके लिए पहल भी शुरू कर दी है। उनके मुताबिक पलायन रोकने के लिए पहाड़ के गांव को स्मार्ट गांव बनाया जाएगा। इससे पहाड़ पर गांव का विकास और रोजगार के संसाधन उपलब्ध होंगे। इस योजना के जरिए युवाओं को अपने गांव में ही रोजगार मिलेगा जिससे उन्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं पडेगा। रुद्रप्रयाग जिले के देवर गांव को स्मार्ट विलेज के अन्तर्गत चयनित किया गया। शासन-प्रशासन की सहायता से गांव को मूलभूत सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
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इसके लिए बकायदा एक कार्यक्रम किया गया। इस मौके पर पंत नगर विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. ए.के. मिश्रा भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि कि गाॅंव के विकास के लिए वक्त वक्त पर बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही गांव में जल सग्रहण, सरक्षंण एवं संवर्द्धन का कार्य करना होगा। कृषकों को क्लस्टर बनाकर एक तरह का व्यवसाय करना होगा, जिससे आय दोगुनी होगी। इस मौके पर जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि स्मार्ट विलेज ग्राम देवर के विकास हेतु विभागों को आपसी समन्वय बनाकर कार्य करना होगा। विभाग को नई तकनीकी से कृषकों को रूबरू कराना होगा जिससे फसलों की उत्पादकता बढे़। इस बीच देवर गांव के प्रधान द्वारा सौ हल और सौ गाय की मांग की है। इस पर जिलाधिकारी ने कृषि एवं पशुपालन विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने की बात कही।
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इसके साथ ही डीएम ने इसे जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। गांव की बजंर भूमि पर 10 परिवारों द्वारा मिलकर कृषि कार्य करने पर खुशी जताई गई। गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के कुलपति पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डा ए. के. मिश्रा ने कृषि विज्ञान केन्द्र जाखधार के वैज्ञानिकों को गांव-गांव जाकर कृषकों को प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रशिक्षण उनकी भाषा में दिया जाए। उन्होंने कहा कि 2022 तक कृषकों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विपणन की व्यवस्था करनी होगी जिससे कृषक अपने उप्पादों का विक्रय कर लाभ अर्जित कर सके। जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि जिले के 35 गांवों के दो हजार किसानों का डेटा-बेस तैयार किया जाएगा। इसके बाद किसानों को भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप पौध वितरण का कार्य किया जाएगा। इस ट्रेनिंग का फॉलोअप भी लिया जाएगा।