देवभूमि के गांव की बेटी, पौखाल क्षेत्र की पहली IAS ,बचपन से दिव्यांग लेकिन हार नहीं मानी
Dec 28 2017 7:09PM, Writer:कपिल
हर तरह की मंजिल तब और भी ज्यादा आसान हो जाती है, जब आपके पास हिम्मत और हौसला हो। उत्तराखंड की बेटियों ने इस बात को साबित भी किया है कि उनके हौसले और जज्बे का कोई मुकाबला नहीं है। इसी कड़ी में नंबर आता है उत्तराखंड के पौखाल के गुमगांव की रहने वाली सोनाक्षी सिंह तोमर का। सोनाक्षी सिंह तोमर इस क्षेत्र की पहली महिला आईएएस ऑफिसर हैं। इस बेटी को बार बार सलाम करने का मन इसलिए करता है क्योंकि ये बचपन से ही दिव्यांग हैं। सोनाक्षी बचपन से ही कान से दिव्यांग हैं। सोनाक्षी ने साल 2016 बैच की आईएएस परीक्षा में 747 वां स्थान हासिल किया था। इन दिनों त्रिपुरा में गोमती जिला के उदयपुर में सोनाक्षी संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात है। सोनाक्षी के भीतर एक जज्बा है, जिसे जड़ों से जुड़ने का जज्बा कहते हैं। उन्हें अपने गांव और अपनी मातृभूमि से प्यार है।
यह भी पढें - उत्तराखंड की उन्नति, कक्षा 7 की छात्रा ने बढ़ाया देवभूमि का मान-सम्मान
यह भी पढें - उत्तराखंड के पीयूष बनूनी से कुछ सीखिए, विदेश की नौकरी छोड़ी, गांव लौटकर रचा इतिहास
सोनाक्षी बीते दिनों अपने कुलदेवता की पूजा अर्चना के लिए पौखाल पहुंची थी। सोनाक्षी ने हमेशा माना कि इंसान को कभी भी अपने बारे में हीन भावना नहीं रखनी चाहिए, इससे आत्मबल गिरता है। हीन भावना तरक्की में बाधक होती है, इसलिए इसे अपने मन से निकाल देना चाहिए। बचपन से ही कान से दिव्यांग सोनाक्षी ने जब ये बातें बताई तो मन में उनके लिए और भी ज्यादा सम्मान जाग गया। उनका कहना है कि जीवन की तरक्की में मेहनत ही सबसे सही रास्ता है। ये रास्ता कठिन जरूर है लेकिन मेहनत करने वाले की कभी हार नहीं होती। सोनाक्षी कहती हैं कि माता पिता और गुरूजनों का मार्ग दर्शन सफलता का मूल मंत्र होता है। सोनाक्षी दो बहनों में से बड़ी बहन हैं। सोनाक्षी के पिता एमएस तोमर कुमाऊं मण्डल विकास निगम नैनीताल में चीफ मैनेजर के पद पर सेवारत हैं।
यह भी पढें - पलायन से लड़ेंगे देवभूमि के गांव, डीएम मंगेश घिल्डियाल की ‘स्मार्ट’ पहल, मिलेगा रोजगार
यह भी पढें - देवभूमि के इस जिलाधिकारी ने वो कर दिखाया, जो आज तक नहीं हो पाया था
इसके अलावा सोनाक्षी की मां कैश आॅफिसर के पद पर एसबीआई नैनीताल में काम कर रही हैं। खास बात ये है कि अपने क्षेत्र से सोनाक्षी पहली आईएएस ऑफिसर हैं। सोनाक्षी बचपन से ही पढ़ने में तेज तर्रार रही हैं। उन्होंने सभी कक्षाओं में प्रथम श्रेणी से अंक प्राप्त किए हैं। सोनाक्षी ने तीसरी बार में आईएएस की परीक्षा में कामयाबी हासिल की है। सोनाक्षी के पिता का कहना है कि उनकी दो बेटियां हैं और उन्होंने बेटियों को हमेशा बेटे जैसा माना। इसके साथ ही सोनाक्षी के पिता कहते हैं कि उनकी बेटियां उनकी उम्मीदों पर खरी उतरी हैं। उन्होने इसके साथ ही दुनिया को संदेश दिया है कि अगर बेटियों को सही तरह से मार्ग दर्शन मिलता है तो वो तरक्की की बुलन्दियां छूती हैं। उन्होंने कहा कि बेटियां ही प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रही हैं। जाहिर सी बात है कि इस तरह के बच्चों की वजह से आने वाले पीढी को मार्ग दर्शन मिलता है।