उत्तराखंड के लिए दुखद खबर, बाबा नीम करौली की उत्तराधिकारी सिद्धि मां नहीं रहीं
Dec 29 2017 9:42AM, Writer:आदिशा
उत्तराखंड के साथ साथ पूरी दुनिया के लिए बेहद ही दुख भरी खबर सामने आ रही है। बाबा नीम करौली महाराज की उत्तराधिकारी सिद्धि मां अब हमारे बीच नहीं रहीं। उनका गुरुवार को नैनीताल के मल्लीताल प्रसादा भवन स्थित आवास तीर्थम् में महाप्रयाण हो गया। सिद्धि मां करीब 92 साल की थीं। उनके महाप्रयाण से पूरी दुनिया में मौजूद अनुयायियों में शोक की लहर है। सिद्धि मां का पार्थिव शरीर एंबुलेंस से अंतिम संस्कार के लिए ऋषिकेश ले जाया गया । सिद्धि मां बीते दो साल से कैंची धाम और नैनीताल आती जाती रही हैं। बताया जा रहा है कि गुरुवार तड़के सिद्धि मां के शरीर में हलचल नहीं हुई। इसके बाद तीर्थम कर्मचारियों ने इसकी सूचना प्रसादा भवन में दी। सिद्धि मां के ब्रह्मलीन की सूचना जैसे ही फैली तो भक्तों का हुजूम तीर्थम् की ओर चल पड़ा।
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कई महिला भक्त ऐसी थीं, जो आखों में आंसू रोक नहीं पा रही थीं। सैकड़ों भक्तों ने धूप और दीप से पूजा अर्चना कर सिद्धि मां को आखिरी विदाई दी। सिद्धि मां बाबा नीम करौली महाराज की अनन्य शिष्या कहीं जाती रही हैं। इसके सात ही वो बाबा नीम करौली महाराज की उत्तराधिकारी भी रही हैं। हर महीने शनिवार और मंगलवार को कैंची धाम में वो भक्तों को दर्शन देती थी। सिद्धि मां अल्मोड़ा की रहने वाली थीं। उनके परिवार में आठ बहनें थीं। उनकी शादी नैनीताल के रहने वाले तुलाराम साह के साथ हुई थी। उनके दो बेटे दिनेश लाल साह, योगेश साह हैं। इसके अलावा उनकी एक बेटी गीता साह हैं। पति के निधन के बाद सिद्धि मां ने घर और परिवार त्याग दिया था। इसके बाद उन्होंने नीम करौली महाराज की सेवा करने का मन बना लिया था।
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बाबा नीम करौली महाराज के देश और दुनिया में कुल मिलाकर 108 आश्रम हैं। इन आश्रमों में सबसे बड़ा आश्रम कैंची धाम अमेरिका के न्यू मैक्सिको सिटी में बना टाउस आश्रम है। बाबा के भक्त भगवान सिंह माजिला का कहना है कि सिद्धि मां ने ही 1980 में ऋषिकेश में आश्रम बनवाया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र प्रसाद के आवास प्रसादा भवन के पास ही तीर्थम भवन बना है, जहां सिद्धी मां रहती थीं। जब गुरुवार तड़के उनके शरीर में हलचल नहीं हुई तो तीर्थम कर्मचारियों ने इसकी सूचना प्रसादा भवन में दो दिन पहले पहुंचे पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद और उनकी बुआ जया प्रसाद को दी। इसके बाद धीरे धीरे यहां लोगों का हुजूम उमड़ना शुरू हो गया था। दुनियाभर के अनुयायियों में इसके बाद से शोक की लहर है। जगह जगह शोकसभाएं कराई जा रही हैं।