image: Rupali and stuti of uttarakhand selected for under 19 cricket camp

देवभूमि के गांव की बेटियां, कभी खेतों में खेला, अब देश देखेगा इनके क्रिकेट का हुनर

Dec 29 2017 4:30PM, Writer:आदिशा

कौन कहता है कि देवभूमि उत्तराखंड के गांवों में हुनर पैदा नहीं होता। हुनर है जनाब, बस एक बार भली आंखों से देखने की जरूरत है। जरा गौर से देखेंगे तो अगला मिसाइल मैन यहीं से मिलेगा, अगला सचिन तेंदुलकर यहीं से मिलेगा। खास तौर पर जब बात बेटियों की हो तो सीना गर्व से फूल जाता है। गांव की बेटियां आज प्रतिभा के मामले में किसी से कम नहीं। गांव की बेटियों ने बार बार साबित किया है कि अगर सही संसाधन मिलें तो बुलंदियों के आसमान को छुआ जा सकता है। ऐसी ही पौड़ी की दो बेटियां हैं नाम है रूपाली और स्तुति। कभी इन बेटियों ने गांव के खेतों और गलियों में बल्ला पकड़ा था। अाज ये बेटियां नेशनल लेवल पर अपना हुनर दिखाने के लिए तैयार हैं। जी हां पैडुल गांव की इन दो बेटियों ने अपने गांव, अपने क्षेत्र और उत्तराखंड का नाम रोशन किया है।

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रूपाली और स्तुति का सलेक्शन नेशनल लेवल के अंडर 19 क्रिकेट कैंप के लिए हुआ है। यू तो उत्तराखंड में एकता बिष्ट और मानसी जोशी जैसी प्रतिभावान खिलाड़ी भी हैं, जो वर्ल्ड क्रिकेट में अपना जलवा दिखा रही हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि इस परंपरा का निर्वहन कौन करेगा ? समाज की बेड़ियों को तोड़कर, खुद पर लगी बंदिशों से आगे निकलकर रूपाली और स्तुति एक बार फिर से तैयार हैं। ये बेटियां अब दुनिया को ये बताने के लिए तैयार हैं कि उत्तराखंड के पहाड़ों में सोना निकलता है, वो भी खरा सोना। स्कूल के साथ-साथ पूरे गांव में उत्साह का माहौल है, जश्न का माहौल है। पूरे गांव ने दोनों बेटियों को आशीर्वाद देकर उन्हें इंदौर के लिए रवाना कर दिया है। अब आपका ये जानना भी जरूरी है कि आखिर इसके लिए इन दोनों बेटियों ने किस कदर पसीना बहाया।

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बीते 4 साल से खेतों में ये बेटियां अपने क्रिकेट के हुनर को तराश रही थीं। कहते हैं कि अगर किसी काम को करना है तो, उसे पागलपन की हद तक जाकर करना होगा, सफलता तभी मिलेगी, विश्वास तभी जागेगा और अगर आपके मन में विश्वास है तो जीत पक्की समझिए। इन दो बेटियों ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि लेकिन किसी चीज को अगर शिद्दत से चाहो, तो पूरी कायनात उसे आपसे मिलाने में जुट जाती है। खेल के प्रति पागलपन और घर वालों के सहयोग का ही नतीजा है कि लड़कियों ने आज ये मुकाम पाया है, वरना इन बेटियों को ना जाने क्या क्या सुनना पड़ा था। इन दोनों बेटियों के सलेक्शन के बाद अब गांव की बाकीलड़कियां भी क्रिकेट खेलकर पहाड़ का नाम रोशन करना चाहती हैं। ये दोनों ही लड़कियां 12 वीं कक्षा पढ़ रही हैं। दोनों का सपना है कि वो आगे चलकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा बनें। शुभकामनाएं आपको, सलाम बेटियां


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