पहाड़ की उड़नपरी, कभी खेतों में की प्रैक्टिस, आज 2000 मीटर रेस की नेशनल चैंपियन है
Jan 4 2018 6:02PM, Writer:कपिल
उम्मीदें जब पंख लगा लें, हौसले जब उड़ान भरने लगें, विश्वास आसमान से ऊपर हो, तो जीत निश्चित होती है। पहाड़ की बेटी ने इस बात को साबित किया है। किसी ने नहीं सोचा था कि खेतों में अभ्यास करने वाली बेटी नेशनल लेवल पर नया रिकॉर्ड कायम करेगी। उत्तराखंड की बेटी की जितनी तारीफ करें, उतनी कम है। खास तौर पर एक प्रतिभा जब पहाड़ों से निकले तो आश्चर्य होता है। जहां ना खेलों के लिए कोई सुविधा, ना कोई सही टेक्नीक, लेकिन इसके बाद भी इतना जबरदस्त प्रदर्शन करना किसी के वश की बात नहीं होती। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में अंकिता ध्यानी ने खेतों में दौड़ लगानी शुरू की। धीरे धीरे इसे अपना जुनून बनाया और आज ये बेटी 2000 मीटर रेस की नेशनल चैंपियन है। अंकिता की कहानी सिर्फ इतनी भर नहीं है। आगे जानेंगे तो रौंगटे खड़े हो जाएंगे।
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अंकिता ने बीते साल नवंबर में आंध्र प्रदेश में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में गोल्ड मेडल अपने नाम किया और वो भी नए रिकॉर्ड के साथ। अब तक अंकिता 5 बार राष्ट्रीय खेलों में हिस्सा ले चुकी हैं। जब अंकिता को गोल्ड मेडल मिलने की खबर सामने आई तो, पिता की आंखें भर आई। 6 मिनट 36 सेकंड में अंकिता ने 2 किलोमीटर की रेस पूरी की और गोल्ड मेडल हासिल किया। अंकिता ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय मेरुड़ा से पांचवीं कक्षा पास की थी। इसके बाद जनता हाईस्कूल लयड़सैंण से उन्होंने आठवीं पास की और GIC मठाली से हाईस्कूल परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की। आज अंकिता स्पोर्ट्स हॉस्टल अगस्तमुनि (रुद्रप्रयाग) में कक्षा 11 वीं में पढ़ाई कर रही हैं। अंकिता के पिता किसान हैं। दिन भर खेतों में काम काज करते हैं और अपने परिवार का पेट पालते हैं। अंकिता के पिता ना नाम महिमा नंद ध्यानी है।
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अंंकिता की मां लक्ष्मी ध्यानी गृहणी हैं। खेल की दृष्टि से देखें तो पहाड़ का सुदूर गांव मेरुड़ा मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। इस गांव से राष्ट्रीय स्तर पर जौहर दिखाने वाली दृढ इच्छाशक्ति अंकिता ने गांव की सर्पीली सड़कों पर अभ्यास किया था, खेतों में अभ्यास किया और आज इस मुकाम पर हैं। आखिर हमें ऐसी बेटी पर गर्व क्यों ना हो, जो पढ़ाई के साथ साथ खेलों में भी जबरदस्त प्रदर्शन कर रही है। अंकिता जब अपने गांव पहुंची तो लोगों ने उनका जमकर स्वागत किया । पहाड़ की इस प्रतिभा को अब बड़े मंच पर लाने की दरकार है। इसमें ना ही कोई शक है और ना ही किसी को गुरेज होनी चाहिए कि देश को अगली पीटी ऊषा पहाड़ों से ही मिलेगी। अंकिता को इस शानदार खेल के लिए कोटि कोटि शुभकामनाएं। यूं ही आगे बढ़ती रहिए, मेहनत कीजिए, पसीना बहाइए, क्योंकि पहाड़ से बहा हुआ पसीना कभी बेकार नहीं गया।