उत्तराखंड की शिक्षिका ने पेश की ईमानदारी की मिसाल, देशभर में हुई तारीफ
Jan 5 2018 9:24PM, Writer:कपिल
अगर ये कह दें कि ईमानदारी के मामले में उत्तराखंडियों का कोई जवाब नहीं है, तो ये भी गलत नहीं होगा। अगर ये भी कह दें कि उत्तराखंड के लोगों के खून में ईमानदारी लहू बनकर दौड़ती है, तो शायद ये भी गलत नहीं होगा। कई बार हम आपको ऐसे किस्सों के बारे में बताते रहे हैं और उत्तराखंडियों की ईमानदारी के बारे में भी बताते रहे हैं। इसी कड़ी में अब एक और नाम जुड़ गया है। इस बार ईमानदारी की मिसाल एक शिक्षिका ने पेश की है। आज के दौर में कई लोगों के लिए पैसे का मोल बहुत ज्यादा है लेकिन एक बात सभी को याद रखनी चाहिए कि पैसे से ज्यादा नैतिक मूल्यों को वजन होता है, ईमानदारी का वजन होता है, सत्य का वजन होता है। जी हां सच में उत्तराखंड में कुछ लोग ऐसे हैं जिनको देख इंसानियत पर विश्वास कायम रखने का मन करता है। हम बात कर रहे हैं मंजू राही जी की।
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मंजू राही जी गर्ल्स बीएड कॉलेज की फिजिकल एजुकेशन की टीचर हैं। बताया जा रहा है कि मंजू राही रुड़की टॉकीज के पास इलाहाबाद बैंक के एटीएम से पैसे निकालने गई। इस दौरान जब उन्होंने एटीएम में निर्धारित रकम डाली तो 5 हजार रुपये और भई ज्यादा निकल आए। हो सकता है कि एटीएम में कोई टेक्निकल फॉल्ट रहा हो। पैसे को देखकर हर किसी का मन खराब होने लगता है। लेकिन मंजू राही ने ईमानदारी की मिसाल पेश की। पहले तो वे हैरान हो गई। इसके बाद उन्होंने अपना मैसेज बॉक्स चेक किया तो पता चला कि ये अतिरिक्त धनराशि उनकी नहीं थी। मंजू ने जब ये मैसेज चेक किया, वो घर पहुंच चुकी थी। इसके बाद वो तुरंत बैंक की शाखा में गई और बैंक प्रबंधक को वो 5 हजार रुपये वापस लौटा दिए। बैंक मैनेजर ने मंजू राही की ईमानदारी की सराहना की।
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बात में पता चला कि शिक्षिका से पहले आइआइटी रुड़की के किसी कॉन्ट्रैक्टर ने पैसे निकाले थे। जब काफी देर तक पैसे नहीं निकले तो वो चला गया था। इसके बाद जब शिक्षिका ने पैसे निकाले गए तो पहली रकम और साथ ही उनके द्वारा डाली गई रकम निकल आई। विद्यालय पहुंचने पर ये बात जब कॉलेज स्टाफ को पता चली तो कॉलेज मैनेजमेंट ने भी मंजू राही की जमकर तारीफ की। अगर आपको लग रहा है कि ये आम बात है और ऐसा होता रहता है, तो आपके ये भी बता दें कि देश में अब तक ऐसे कुछ ही किस्से सामने आए हैं, जब लोगों ने इसत तरह से ईमानदारी की मिसाल पेश की हो। मंजू राही जी की जितनी तारीफ की जाए उतनी ही कम है। इस ईमानदारी के जरिए उन्होंने साबित किया है कि उत्तराखंडियों में ईमानदारी कूट-कूटकर भरी है।