उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा ऐलान, ’दुष्कर्म करने वालों के लिए फांसी का कानून बनाओ’
Jan 6 2018 5:13PM, Writer:कपिल
देवभूमि में बच्चों की तरफ जो भी गंदी नजर से देखेगा, अब वो ऐसा करने से पहले हजार बार सोचेगा। अगर सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही सरकार एक बड़ा कानून बना सकती है। हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में 15 साल और इससे छोटे बच्चों से दुष्कर्म और हत्या के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार निर्देश दिए हैं कि तीन महीने के भीतर मृत्युदंड का कानून बनाया जाए। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और आलोक सिंह की बैंच ने इस मामले में सुनवाई की है। अब ये बी जानिए कि आखिर ये मामला कहां से उठा ? साल 2016 में एक मामले ने उत्तराखंड को हिला कर रख दिया था। काशीपुर निवासी एक परिवार ने 26 जून 2016 को अपनी 8 साल की बेटी की दुष्कर्म के बाद हत्या की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई थी। 25 जून 2016 को एक मासूम देवी जागरण में गई थी। देवी जागरण से ही बच्ची को अगवा किया गया था।
यह भी पढें - उत्तराखंड के लिए उत्तराखंड पुलिस का ‘सुखद प्रोजक्ट’, देश में पहली बार हुआ ऐसा काम !
यह भी पढें - Video: उत्तराखंड में पब्लिक के हाथ में कानून ? 12 साल के लड़के को नंगा कर चप्पलों से कूटा
इसके बाद आरोपी ने दुष्कर्म के बाद मासूम की हत्या कर डाली थी। अप्रैल 2017 में जब निचली अदालत में इस केस के सुनवाई हुई तो दोषी को फांसी की सजा सुनवाई गई थी। अपर जिला सत्र न्यायालय में अप्रैल 2017 में काशीपुर निवासी अभियुक्त करनदीप शर्मा को फांसी की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद इस केस को हाईकोर्ट तक ले जाया गया था। हाईकोर्ट में निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगाई गई। इसके साथ ही हाईकोर्ट द्वारा सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि 15 साल और इससे छोटी उम्र के बच्चों की दुष्कर्म, हत्या के मामले में अलग से मृत्युदंड का कानून तैयार किया जाए। निचली अदालत की फांसी की सजा के कंफरमेशन को लेकर राज्य सरकार की तरफ से ही हाईकोर्ट में ये मामला दायर किया गया था। इस दौरान कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया है।
यह भी पढें - उत्तराखंड के 1 लाख से ज्यादा युवाओं को मिलेगा रोजगार, बड़ी तैयारी में सरकार
यह भी पढें - बड़ी खबर: हरिद्वार के डीएम दीपक रावत पर केस दर्ज, 27 जनवरी को कोर्ट में सुनवाई !
हाईकोर्ट के वकील संजीव कोठारी का कहना है कि ‘’प्रदेश सरकार केंद्र सरकार के स्तर पर बने कानूनों में अपने मुताबिक बदलाव कर सकती है। इसमें आईपीसी और पॉक्सो जैसे प्रावधान शामिल हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार देश में बच्चों के अपराध में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अकेले उत्तराखंड में 2016 में बच्चों के अपरहण के 436 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा दुष्कर्म के 218 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही पॉक्सो के 91 और शारीरिक उत्पीड़न के 35 केस सामने आए हैं। कोर्ट ने कहा है कि उत्तराखंड में बच्चों के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। इन तमाम बातों को देखते हुए सरकार को अब सख्त कानून बनाना चाहिए। हाईकोर्ट द्वारा कहा गया है कि 3 महीने के भीतर प्रदेश में इस कानून को लाया जाए, जिससे बच्चों पर नजर उठाने वालों के दिल में खौफ पैदा हो।