अग्निपथ पर उत्तराखंड के तेज तर्रार डीएम दीपक रावत, कोर्ट से मिला एक और झटका !
Jan 7 2018 12:56PM, Writer:कपिल
उत्तराखंड के तेज तर्रार डीएम की छवि रखने वाले दीपक रावत एक बार फिर से मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा है। वो पहले से ही परेशानियों में घिरे हैं। ऐसे में एक और आरोप उन पर लगा है। मातृसदन ने ही उन पर ये गंभीर आरोप लगाया है। मातृसदन ने डीएम दीपक रावत पर नुकसान पहुंचाने की नीयत से राजस्व कागजात रचने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन पर आश्रम में घुसकर धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का आरोप भी लगा है। एसीजेएम कोर्ट में ये शिकायत दायर की गई है। कोर्ट ने मामले का संज्ञान रखते हुए 8 जनवरी की तारीख मुकर्रर की है। मातृसदन के ब्रहाचारी दयानंद ने ये आरोप डीएम दीपक रावत पर लगाए हैं। उन्होंने डीएम दीपक रावत पर आश्रम की प्रवित्रता को नष्ट करने का आरोप लगाया है।
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दायर शिकायत में डीएम हरिद्वार पर आरोप है कि उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया और आश्रम की जमीन की नापतोल के बहाने आश्रम की प्रवित्रता और शांति को भंग किया। आरोप है कि डीएम ने सिंचाई और वन विभाग के अधिकारियों को आश्रम में भेजा और सरकारी जमीन कब्जाने की कोशिश की गई। कुछ दिनों पहले डीएम दीपक रावत पर हत्या का केस दर्ज हुआ था। उन पर मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को जान से मारने की कोशिश के गंभीर आरोप लगा था। वकील अरुण भदौरिया ने सीजीएम कोर्ट में डीएम दीपक रावत के खिलाफ केस दर्ज करवाया । दरअसल बीते कई दिनों से अवैध खनन को लेकर स्वामी शिवानंद के शिष्य मातृ सदन में अनशन कर रहे थे। अनशन के दौरान उनकी हालत बिगड़ रही थी, तो डीएम दीपक रावत के आदेश के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
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इसके बाद 25 दिसंबर को डीएम दीपक रावत के सम्मान में एक समारोह आयोजित किया गया था। इसी दौरान मातृसदन के आत्मबोधानंद ने स्टेज पर पहुंचकर सम्मान समारोह का विरोध किया था। आरोप है कि इसके बाद डीएम ने अपने गनर के साथ मिलकर ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को कमरे में बंद किया और जमकर पीटा। इसके बाद बेहोशी की हालत में ही आत्मबोधानंद को जेल भेज दिया गया। आत्मबोधानंद ने कहा कि वो स्टेज पर सिर्फ ये पूछने के लिए चढ़े थे कि डीएम को संस्था आखिर क्यों सम्मानित कर रही है? ये मामला लगातार पेचीदा होता जा रहा है और अब तक डीएम का इस बारे में कोई बयान नहीं आया है। सीजीएम कोर्ट में डीएम दीपक रावत के खिलाफ IPC धारा 201, 295, 298, 323, 324, 325, 326, 307, 341 एवं 342 के तहत कोर्ट में केस दर्ज करवाया गया है।