Video: देवभूमि की यादों में बसे हैं ये लोकगीत, पहाड़ी लड़के ने गाया तो गजब हो गया
Jan 8 2018 7:48PM, Writer:मीत
एक बार फिर से कुछ प्यारे से बोल आपके दिल को जीत लेंगे। एक बार फिर से पहाड़ की वादियों में खोने के लिए तैयार हो जाइए। जी हां एक बार फिर से उत्तरकाशी के रहने वाले अर्पित शिखर एक बेहतरीन गीत लेकर आए हैं। इस गीत की खास बात ये है कि पहली बार गढ़वाली, कुमाउंनी और जौनसारी गीतों को मिलाकर एक गीत तैयार किया गया है। अर्पित शिखर की आवाज कमाल की है, वीडियो एडिटंग, संगीत और गीतों के बोल लाजवाब हैं। सबसे पहले इस वीडियो की शुरुआत कुमाऊं के बेहतरीन गीतों में से एक ‘’आज का दिना’’ से होती है। इसके बाद अर्पित अपनी आवाज से समा बांधते जा रहे हैं। इसके बाद जौनसारी गीत ‘’नीरू चली घूमदी’’ कानों को और भी ज्यादा सुकून दे रहा है। अर्पित यूं तो एक बेहतरीन रैपर भी हैं, लेकिन इसके साथ ही वो पारंपरिक गीतों में भी अच्छी पकड़ रखते हैं।
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आखिर में गढ़वाल के दो गीत ठंडो रे ठंडो और ना बैठ बिंदी चरखी मां ने दिल जीत लिया है। ये ही तो उत्तराखंड है, जो अलग अलग संस्कृति और अलग अलग रिवाजों को खुद में संजोए हुए है। इसी परंपरा और इन्ही रिवाजों को आगे बढ़ाने का काम ये युवा कर रहे हैं। अर्पित के बारे में भी आपको बता देते हैं। उत्तरकाशी में एक छोटी से जगह है पुरोला, अर्पित वहीं के रहने वाले हैं। अर्पित के माता और पिता दोनों ही शिक्षक हैं। शुरुआती पढ़ाई पुरोला से ही करने के बाद अर्पित नाम कमाने की चाहत में देहरादून आ गए थे। यहां शाश्वत पंडित और राहुल बौरियांन जैसे लोगों को साथ मिला, तो अर्पित को खुद पर भरोसा होने लगा था। शाश्वत खुद एक बेहतरीन सिंगर हैं, उनके बारे में एक और खास बात ये है कि वो प्रतिभाओं की कद्र करते हैं। शाश्वत और राहुल के साथ रहकर अर्पित ने अपने हुनर को तराशना शुरू किया था।
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एक और खास बात ये है कि अर्पित ने हाल ही में ही इस क्षेत्र में पहचान बनाने की सोची। पहले शायद उन्होंने इस बारे में नहीं सोचा था कि संगीत के क्षेत्र में नाम कमाएंगे। लेकिन कहते हैं ना कि किस्मत को जो मंजूर हो, होता वहीं है। अर्पित के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ और आज वो एक और बेहतरीन गीत लेकर हम सभी के सामने हैं। राज्य समीक्षा की टीम की तरफ से अर्पित को हार्दिक शुभकामनाएं।