पहाड़ के गरीब घरों की उम्मीद है ये ‘’लेडी सिंघम’’, जो आज तक नहीं हुआ, वो अब हो रहा है
Jan 23 2018 9:44AM, Writer:कपिल
उत्तराखंड के कई जिलों में ऐसे ऐसे प्रशासनिक अधिकारी हैं,जो समाज में शिक्षा और रोजगार की नई अलख जला रहे हैं। ऐसे अधिकारियों की सोच समाज के लिए समर्पित है और इस समर्पण भाव के आगे कभी व्यस्तता सामने नहीं आती। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के बारे में तो आपने सुना ही होगा। यहां के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल अपने कामों से लोगों के दिलों में जगह बना रहे हैं, तो इस जिले की उपजिलाधिकारी मुक्ता मिश्र भी इस मामले में किसी से कम नहीं हैं। प्रशासनिक व्यस्तता के बाद भी एसडीएम मुक्ता मिश्र 50 से अधिक युवाओं को राजामा प्रतियोगी परीक्षा की ट्रेनिंग दे रही हैं। ये ट्रेनिंग मुफ्त में दी जा रही है। युवाओं को देश के सम्मानित और प्रतिष्ठित विद्यालयों की प्रवेश परीक्षा की कोचिंग दी जा रही है।
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एसडीएम मुक्ता मिश्र की इस पहल के बाद पहाड़ के गरीब छात्रों में एक उम्मीद जागी है। गरीब घरद के बच्चों में अच्छी पढ़ाई की उम्मीद जागी है। राजकीय इंटर कॉलेज रुद्रप्रयाग में सुबह आठ से दस बजे तक रोजाना कोचिंग क्लास चलाई जाती है। मुक्ता मूलरूप से चमोली के देवाल गांव की रहने वाली है। मुक्ता 2014 बैच की पीएसीएस अधिकारी हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर देवाल से की है। इसके बाद उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय से उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा पूरी की। उनका बचपन पहाड़ के एक साधारण परिवार में बीता था। घर में सीमित संसाधन होने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई और मेहनत से नाता नहीं तोड़ा। अपनी अटूट लगन से उन्होंने ये मुकाम हासिल किया। एसडीएम मुक्ता मिश्र कहती हैं कि समय का सही उपयोग की इंसान को जीवन में उन्नति देता है।
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मुक्ता कहती हैं कि रुद्रप्रयाग में एसडीएम सदर के पद पर तैनात होने के बाद उन्होंने डीएम मंगेश घिल्डियाल की प्रेरणा ली। उन्होंने गरीब बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने का मन बनाया। पहाड़ में इस वक्त बच्चों के पास ऐसा कोई संस्थान नहीं हैं, जहां वो 12वीं के बाद सही तरह से कोचिंग ले पाएं। गरीब घर के छात्र तो तैयारी के बारे में सोच भी नहीं सकते। पहाड़ के लड़ॉके सिविल सेवा में अच्छा प्रदर्शन कर सकें, इसके लिए एसडीएम ने राजकीय इंटर कॉलेज रुद्रप्रयाग में कोचिंग की फ्री कक्षाएं शुरू कीं। आज अगस्त्यमुनि, तिलवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों के 50 से ज्यादा बच्चे यहां कोचिंग ले रहे हैं। जाहिर है कि आज पहाड़ॉों को ऐसे अधिकारियों की काफी जरूरत है। मुक्ता मिश्र के इस काम की जितनी तारीफ की जाए उतना कम है।