उत्तराखंड के युवाओं को जनरल बिपिन रावत का तोहफा, सेना भर्ती के लिए लंबाई में मिली छूट
Jan 23 2018 7:17PM, Writer:आदिशा
उत्तराखंड के युवाओं के लिए अच्छी खबर है। काफी वक्त से हालांकि इस बात का इंतजार हो रहा था। आखिरकार जनरल बिपिन रावत ने वो तोहफा दे ही दिया। लंबे वक्त से कहा जा रहा था कि पहाड़ के युवाओं को सेना में भर्ती के लिए लंबाई में छूट मिल सकती है। अब ऐसा हो गया है। उत्तराखंड के जो युवा आर्मी में लम्बाई की वजह से भर्ती नहीं हो पाते थे, उनके लिए अब खुशखबरी है। पर्वतीय जिलों के युवाओं को अब 166 के बजाय 163 सेंटीमीटर हाइट पर भर्ती होने का मौका मिलेगाI सेना की इस साल होने वाली भर्ती में ये नियम पूरी तरह लागू होगा I बताया जा रहा है कि ये आदेश सेना भर्ती कार्यालय को मिल चुका है। यहां तक कि गढ़ी कैंट में इस वक्त सेना भर्ती चल रही है और युवाओं के बकायदा इस नए नियम के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इस बीच एक और खबर ये भी है कि अप्रैल के पहले हफ्ते में एक बार फिर से सेना भर्ती ओपन होगी।
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अप्रैल में होने वाली भर्ती में भी ये नया नियम लागू कर दिया जाएगा। कहा जाता है कि उत्तराखंड के युवाओं में देशभक्ति का जज्बा उफान मारता है। आज उत्तराखंड का हर पांचवा शख्स सेना से जुड़ा है। ऐसे में युवाओं को ये बड़ा तोहफा मिलना खुशखबरी से कम नहीं है। इसके अलावा भी एक और खुशखबरी है। अब बताया जा रहा है कि जल्द ही उत्तराखंड में ब्रांच रिक्रूंटिंग ऑफिस भी खुल सकता है। इसे लेकर हाल ही में मसूरी विधायक गणेश जोशी ने थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत से मुलाकात की है। इस मुलाकात में उन्होंने उत्तराखंड में सेना भर्ती के लिए ब्रांच रिक्रूटिंग ऑफिस खोलने की मांग की है। उन्होंने सेना के ब्रांच रिक्रुटिंग ऑफिस की स्थापना उत्तराखंड में ही करने की मांग की है। बताया जा रहा है कि आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने भी विधायक गणेश जोशी को आश्वासन दिया है।
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जनरल बिपिन रावत ने कहा कि उत्तराखंड में जल्द ही बीआरओ यानी ब्रांच रिक्रूटिंग ऑफिस खोला जाएगा। उत्तराखंड के युवाओं में किस कदर देश सेवा का जज्बा है, इसका एक उदाहरण भी हम आपको दे रहे हैं। करगिल युद्ध में उत्तराखंड के सबसे ज्यादा रणबांकुरों ने दुश्मन को देश की सरहद से बाहर खदेड़ा था। उत्तराखंड के 75 रणबांकुरें कारगिल युद्ध में शहीद हुए। राज्य के 30 सैनिकों को उनके अदम्य साहस के लिए वीरता पदकों से अलंकृत किया। राज्य की कुमाऊं और गढ़वाल रेजिमेंट ने कारगिल युद्ध में दुश्मन को मार भगाने में अहम योगदान दिया है। गढवाल रेजिमेंट के 54 सैनिक शहीद हुए थे। कारगिल युद्ध में भाग लेने वाली लगभग हर रेजिमेंट में उत्तराखंड के बहादुर सैनिक शामिल थे। भारतीय सेना ने 524 सैनिकों को खोया तो वहीं 1363 गंभीर रूप से घायल हुए।