उत्तराखंड शहीद जगदीश पुरोहित, जाते जाते भी आतंकियों के काल बने...जय हिंद
Jan 24 2018 7:53PM, Writer:कपिल
वो माटी का सपूत था, शेरों सी उसकी दहाड़ थी, जब भी जंग के मैदान पर उतरता था तो भारत माता की जयकार लगाता था। भारतीय सेना के लिए चमोली जिले का लाल जगदीश पुरोहित किसी हीरो से कम नहीं था। पहाड़ के इस सपूत के दिल में आतंकियों को नेस्तनाबूत करने का जोश उबाल मारता था। 20 जनवरी का दिन था। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में अचानक गोलियों की आवाज सुनाई देने लगी। हर तरफ हाहाकार मच गया। भारतीय सेना अलर्ट मोड में आई तो पता चला कि पाकिस्तान के रेंजर्स ने एक बार फिर से सीजफायर का उल्लंघन कर दिया है। पाकिस्तान ने कृष्णा घाटी सेक्टर में हिंदुस्तान की चौकियों को निशाना बना दिया और वो भी बिना किसी उकसावे के। छुप कर वार करना और पीठ पीछे छुरा भोंकना पाकिस्तान की पुरानी आदत रही है। बिना डरे और बिना रुके भारतीय सेना की टुकड़ी आगे बड़ी।
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ये भारतीय सेना की महार केजीमेंट की टुकड़ी थी। दुश्मनों की गोली का जवाब गोली से दिया गया। पाकिस्तानी रेंजर्स अब बौखला गए थे। पाक रेंजर्स के सामने बड़ा सवाल ये था कि आखिर आतंकियों से घुसपैठ कैसे कराई जाए। भारतीय सेना ने पाक की इस करतूत को कामयाब नहीं होने दिया। उत्तराखंड के सपूत जगदीश पुरोहित की बंदूक से निकली गोलियां पाकिस्तानी रेंजर्स के लिए काल बनती जा रही थी। लेकिन तभी एक गोली सनसनाती हुई जगदीश को आ लगी। इसके बाद भी उन्होंने अपनी बंदूक थामे रखी। आंखों के आगे अंधेरा छा रहा था लेकिन क्या मजाल की भारत माता का ये सपूत डगमगा जाए। पाकिस्तानी रेजर्स का एक भी इरादा कामयाब नहीं होने दिया और आखिरकार ये सपूत जमीन पर गिर पड़ा। इसके तुरंत बाद उन्हें कवर फायर देकर आर्मी हबॉस्पिटल ले जाया गया।
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इलाज चल रहा था और शायद जगदीश की आंखों में अपना गांव घूम रहा था, अपने पहाड़ की वादियां और अपना परिवार आंखों के सामने आ रहा था। आखिरकार ये सपूत मातृभूमि के लिए कुर्बान हो गया। हैरानी तब होती है जब खबर आती है कि जगदीश का एक डेढ़ साल का बच्चा था, एक 5 साल की बेटी थी। सिर्फ 34 साल की उम्र में ही ये वीर जवान देश की खातिर कुर्बान हो गया। पाकिस्तान की ओर से पिछले चार दिन में एलओसी पर जम्मू के 5 जिलों में फायरिंग हुई है। बताया जा रहा है कि इस फायरिंग में अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है। जिनमें 6 नागरिक, 3 सेना के जवान और दो बीएसएफ जवान शामिल हैं। उत्तराखंड के वीर सपूतों ने देश की रक्षा में हर बार खुद को कुर्बान किया है। याद रखिए अगर आप आज चन की सांस ले पा रहे हैं तो इन वीरों की वजह से ले रहे हैं। उत्तराखंड जगदीश पुरोहित की ये शहादत कभी नहीं भूलेगा।