Video: उत्तराखंड के लिए दिल्ली से आया शुभ संदेश, संस्कृति बचाने की ये कोशिश बेहतरीन है
Jan 29 2018 2:22PM, Writer:कपिल
आज उत्तराखंड के दिल में क्या है ? हमारे बुजुर्गों, हमारे गांव के लोगों की सोच क्या है ? हर कोई ये ही चाहता है कि हम भले ही कितने ही आगे बढ़ जाएं, लेकिन अपनी संस्कृति, सभ्यता और भाषा के साथ चलें। बुजुर्गों को अक्सर आपने इस बात पर चिंता जाहिर करते देखा होगा कि शहरीकरण की दौड़ में उत्तराखंड के लोग अपनी बोली, भाषा और संस्कृति भूल रहे हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसीतस्वीर दिखाने जा रहे हैं, जिसे देखखर आपको खुशी मिलेगी, एक अच्छा सा एहसास होगा, भविष्य की फिक्र पर धुंधलाती धुंध थोड़ा दूर होगी, जब दिल्ली की एक क्लास में नौनिहालों को गढ़वाली और कुमाउंनी का ट्यूशन लेते देखेंगे। दिल्ली में साकेत, मालवीय नगर, सरोजनी नगर, शकरपुर, लक्ष्मीगर, पांडव नगर, विनोदनगर जैसी काफी जगहें हैं, जहां उत्तराखंड के लोग काफी बड़ी संख्या में रहते हैं।
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आम तौर पर कहा जाता है कि लोग दिल्ली जाकर अपनी संस्कृति और सभ्यता से दूर हो जाते हैं लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां लोगों ने अपने बच्चों को अपनी संस्कृति की शिक्षा देने के लिए गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषा में कोचिंग देनी शुरू की है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि इस कोचिंग क्लास में बच्चों की कोई कमी नहीं है। वैसे एक आंकड़ा ये भी कहता है कि आज के बच्चे अपनी संस्कृति की तरफ ज्यादा रुझान दिखा रहे हैं। चाहे वो बच्चे शहरों में रहने वाले हों, या फिर पहाड़ों में रहने वाले हों। इतना जरूर है कि शहरी बच्चों में अपनी बोली और भाषा को सीखने की ललक जाग रही है। एक कड़ा ये भी कहता है कि दिल्ली में रह रहे 80 फीसदी उत्तराखंडी युवा चाहते हैं कि वो वापस अपने गांव लौट जाएं। पहाड़ से जुड़े युवाओं में अपनी बोली और भाषा के प्रति लगातार प्यार बढ़ रहा है।
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दिल्ली में चल रही इस शानदार पहल की हर तरफ तारीफ हो रही है। आइए अब आपको उस कोचिंग क्लास का भी एक वीडियो दिखा देते हैं। शुभ संदेश देता ये वीडियो भी आप देख लीजिए।