वाह उत्तराखंड: ऋषिकेश एम्स में लगी 30 करोड़ की मशीन, कैंसर पेशेंट को मिलेगा सस्ता इलाज
Jan 30 2018 7:56PM, Writer:कपिल
उत्तराखंड के लिए एक और बड़ी खुशखबरी है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आपको किसी और राज्य में नहीं जाना पड़ेगा। देखा जाता है कि उत्तराखंड से हर साल सैकड़ों मरीज कैंसर के इलाज के लिए उत्तराखंड से बाहरी राज्यों में चले जाते हैं। यहां तक कि लोग विदेशों में भी इलाज के लिए जाते हैं। कई बार तो लोग मंहगे इलाज के चक्कर में ही फंस जाते हैं। लेकिन अब इन सब बातों की फिक्र छोड़ दीजिए। अब आपको इस गंभीर बीमारी का इलाज उत्तराखंड में ही मिलेगा। ऋषिकेश से एक शानदार खबर सामने आई है। कैंसर के उपचार के लिए अब मरीजों को लाखों रुपये खर्च नहीं करने पड़ेंगे। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स ऋषिकेश में सिर्फ 5 हजार रुपये में कैंसर का इलाज होगा। इसके लिए एम्स में हाईटेक मशीन लगा दी गई है।
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एम्स के निदेशक प्रोफेसर डा. रविकांत ने एम्स के रेडियोलॉजी विभाग में हाई एनर्जी लीनियर एक्सीलेटर मशीन का शुभारंभ किया था। इस मशीन की लागत करीब 30 करोड़ रुपये है। इसके जरिए अब शनिवार से कैंसर के मरीजों का सस्ता इलाज शुरू होगा। प्रोफेसर डा. रविकांत ने इस दौरान मीडिया को भी कुछ खास बातें बताई। उनका कहना है कि कई नॉन कैंसर बीमारियों जैसे ट्रिजेमिनल न्यूरलजिया, एवी मैलफंक्शन ऑफ ब्रैन और नॉक कैंसर वाले टयूमर का इलाज भी इस मशीन से हो सकेगा । इस मशीन के बारे में डॉक्टर ने खास बात बताई। उन्होंने कहा कि देशभर के 6 एम्स में सबसे पहले एम्स ऋषिकेश में ही इस मशीन को लगाया गया है। इससे उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों के कैंसर मरीजों को फायदा मिलेगा।
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एम्स के पीआरओ हरीश थपलियाल ने भी इस बारे में खास बातें बताई हैं। उन्होंने बताया कि इस मशीन से कैंसर का उपचार सिर्फ पांच हजार रुपये में होगा। आम तौर पर प्राइवेट अस्पतालों में करीब 3 लाख रुपये तक खर्चा आता है। इस मशीन के जरिए कैंसर के तमाम ट्श्यू को नष्ट कर दिया जाता है। खैर उत्तराखंड के लिहाज से इस खबर को बेहतरीन कहा जा सकता है। अब लोगों को इलाज के लिए पीजीआई दिल्ली और पीजीआई चंडीगढ़ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। देखा जा रहा है कि बाहर जाने की वजह से कई लोगों का काफी खर्चा आ जाता था। अब लाखों में नहीं बल्कि सिर्फ 5 हजार रुपये में कैंसर के मरीजों का इलाज होगा। चिकित्सा के क्षेत्र में उत्तराखंडियों के लिए ये क अच्छी उपलब्धि कही जा सकती है।